“बिसनाथ को अपने गाँव बिस्कोहर से जो लगाव है वह मूलतः मनुष्य की अपनी स्मृतियों के प्रति लगाव का ही एक रूप है।” ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर सोदाहरण टिप्पणी कीजिए।
मालवा में ऋतु परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप पहले कौन-से बदलाव होते थे ? वर्तमान में उसमें क्या अंतर आया है ? इस अंतर के कारणों की पड़ताल कीजिए ।
ग्रामीण परिवेश में जन्मे, पले-बढ़े व्यक्ति का आगे का जीवन भले ही शहर में बीते पर उसकी स्मृतियों का गाँव सदैव मोहक और आकर्षक बना रहता है । – ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर सोदाहरण लिखिए ।
झोंपड़ी जलने के बाद भी स्वयं पर नियंत्रण रखने वाला सूरदास कब और क्यों बिलख-बिलख कर रोने लगा ? इस घटना के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है ?
विकास की अंधी दौड़ का क्या दुष्परिणाम सामने आया ? ऐसी परिस्थिति में बदलाव के क्या उपाय हो सकते हैं ? ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के आधार पर लिखिए।
‘गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफात’ पाठ के आधार पर लिखिए कि गांधीजी ने रोगी बालक से कैसा बर्ताव किया । इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ?
‘उर्दू कानों में हम लोगों की बोली कुछ अनोखी लगती’ – पंक्ति के द्वारा लेखक रामचंद्र शुक्ल तत्कालीन भाषिक समाज की किस विशेषता पर टिप्पणी कर रहे थे ? हिंदी और उर्दू के संबंध पर आपकी क्या राय है ?
विद्यापति की नायिका के दारुण दुख का क्या कारण है ? लोगों के प्रति उसका क्या भाव है ?
‘बीट’ को स्पष्ट करते हुए उसकी विशेष तैयारियों के महत्त्व को समझाइए।
पहले के मालवा और अब के मालवा में लेखक को क्या अंतर दिख रहा था ? इसके लिए उत्तरदायी तत्त्वों को पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
“बिसनाथ मान ही नहीं सकते कि बिस्कोहर से अच्छा कोई गाँव हो सकता है और बिस्कोहर से ज्यादा सुंदर कहीं की औरत हो सकती है।” – इस वाक्य के माध्यम से बिसनाथ के चरित्र की विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए । उनके ऊपर अपने बचपन के प्रभाव का विवेचन भी कीजिए।
‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ में सुभागी सूरदास के पास क्यों आई थी ? उसने भैरों के पास जाने का निश्चय क्यों किया ? इससे उसके चरित्र की कौन-कौन-सी विशेषताएँ सामने आती हैं ?
‘संवदिया’ की भूमिका स्पष्ट करते हुए लिखिए कि आप हरगोबिन की जगह होते तो क्या करते । (तर्कपूर्ण उत्तर अपेक्षित)
‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ में शरणार्थी किन्हें कहा गया है ? वे अपने ही देश में शरणार्थी कैसे बन गए ?
विद्यापति के पदों में वर्णित नायिका की दशा कैसी है ? उसके प्रति आपके मन में कौन-से भाव उभरते हैं ?
‘देवसेना का गीत’ वेदना और निराशा के मनोभावों का एक चित्र है – कैसे ?
यह क्यों कहा जाता है कि नाटक ही एक ऐसी विधा है जो हमेशा वर्तमान काल में घटित होती है । किसी ऐतिहासिक या पौराणिक नाटक के उदाहरण से इसे स्पष्ट कीजिए।
जनसंचार के विभिन्न माध्यमों का उल्लेख करते हुए उनकी एक-एक ख़ूबियों को लिखिए। (किन्हीं तीन का उल्लेख आवश्यक है)
“झोंपड़े की आग ईर्ष्या की आग की भाँति कभी नहीं बुझती।” ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ में किसकी ईर्ष्या का उल्लेख किया गया है? ईर्ष्या का कारण क्या है? क्या आपको लगता है कि वह कारण सहज, स्वाभाविक और मानवीय है? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
हमारी तथाकथित विकसित सभ्यता अपनी ही प्राचीन ज्ञान परंपरा को भूलकर प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते हुए विनाश को रास्ता दे रही है। ‘अपना मालवा....’ पाठ के आधार पर लिखिए कि ऐसा कैसे और क्यों हो रहा है।
‘दूसरा देवदास’ पाठ में संभव ने मज़ाक-मज़ाक में अपना नाम ‘संभव देवदास’ क्यों कहा? इसमें कौन-सा साहित्यिक संकेत छिपा हुआ है?
‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के आधार पर लिखिए कि विकास की आधुनिक परिकल्पना ने पर्यावरण विनाश की नींव रखी है।
‘कुटज’ पाठ के आधार पर उसकी अपराजेय जीवनी शक्ति को उदाहरण सहित समझाइए।
घनानंद के 'कवित्त' के आधार पर उनकी नायिका की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। (कोई दो विशेषताएँ अपेक्षित)
महानगरीय जीवन में मनुष्य प्रकृति से दूर हो गया है — इस बात को 'वसंत आया' कविता किस प्रकार रेखांकित करती है?