Question:medium

“झोंपड़े की आग ईर्ष्या की आग की भाँति कभी नहीं बुझती।” ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ में किसकी ईर्ष्या का उल्लेख किया गया है? ईर्ष्या का कारण क्या है? क्या आपको लगता है कि वह कारण सहज, स्वाभाविक और मानवीय है? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। 
 

Show Hint

ईर्ष्या जैसे भाव मानवीय हैं, लेकिन सामाजिक दृष्टि से वे विनाशकारी होते हैं — यह भलीभांति रेखांकित करें।
Updated On: Jan 14, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

पाठ में, सूरदास की झोंपड़ी जलने के पीछे ठाकुर की ईर्ष्या का भाव था। ठाकुर इस बात से नाराज़ था कि एक अंधे भिखारी (सूरदास) को गाँव के लोग सम्मान दे रहे थे।
सूरदास की झोंपड़ी उसकी आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का प्रतीक थी, जिससे ठाकुर ईर्ष्या करता था।
यह भावना स्वाभाविक है, क्योंकि इंसान अक्सर दूसरों से तुलना करता है और असुरक्षित महसूस करता है, लेकिन इसे सही नहीं ठहराया जा सकता।
ठाकुर का व्यवहार दिखाता है कि जब कोई घमंड और शक्ति के नशे में होता है, तो वह छोटी-छोटी बातों को भी सहन नहीं कर पाता।
Was this answer helpful?
0