Question:medium

झोंपड़ी जलने के बाद भी स्वयं पर नियंत्रण रखने वाला सूरदास कब और क्यों बिलख-बिलख कर रोने लगा ? इस घटना के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है ?

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यह घटना यह दर्शाती है कि भले ही व्यक्ति अपने आंतरिक संघर्षों को दबाने की कोशिश करता है, लेकिन अपनी भावनाओं का प्रदर्शन भी जरूरी होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ में, सूरदास की झोंपड़ी जलने के बाद, वह खुद पर नियंत्रण रखने की कोशिश करता है, अपने गुस्से और दर्द को दबाता है। हालांकि, उसका आंतरिक संघर्ष गहरा है, फिर भी वह कुछ देर खुद को संभालता है। उसे अपनी संपत्ति के नुकसान का दुख तो है ही, साथ ही यह उसके अस्तित्व पर भी गहरी चोट है।
शुरू में, सूरदास शांत रहने की कोशिश करता है, लेकिन उसकी भावनाएँ तीव्र हो जाती हैं। जब वह अंदर के दर्द को नियंत्रित नहीं कर पाता, तो वह फूट-फूट कर रोने लगता है। यह दृश्य दिखाता है कि जब एक व्यक्ति अपने आंतरिक संघर्ष से जूझता है और उसे स्वीकार करता है, तो वह अपनी भावनाओं को व्यक्त कर पाता है।
इस घटना से पता चलता है कि मनुष्य के स्वभाव में भावनाओं का दबाव और संघर्ष के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल है। भले ही वह बाहर से खुद को नियंत्रित करने की कोशिश करे, लेकिन जब अंदर की भावनाएँ बहुत प्रबल हो जाती हैं, तो आत्म-नियंत्रण टूट जाता है। यह घटना दिखाती है कि मानवता में कमजोरी और संवेदनशीलता भी है, जिसे छुपाने के बजाय, व्यक्त करने की आवश्यकता होती है।
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