Question:medium

विश्वस्य स्रष्टा ईश्वर: एक एव' इति भारतीयसंस्कृते: मूलम्। विभिन्नमतावलम्बिन: विविधै: नामभि: एकम् एव ईश्वरं भजन्ते। अग्नि:, इन्द्र:, कृष्ण:, करीम:, राम:, रहीम:, जिन:, बुद्ध:, ख्रिस्त:, अल्लाह: इत्यादीनि नामानि एकस्य एव परमात्मन: सन्ति। तम् एव ईश्वरं जना: गुरु: इत्यपि मन्यते। अत: सर्वेषां मतानां समभाव: सम्मानश्च अस्माकं संस्कृते: सन्देश:। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए) 
 

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'विश्वस्य स्रष्टा' का अर्थ है 'संसार का निर्माता' और 'समभाव' का अर्थ है 'समान दृष्टिकोण'।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश भारतीय संस्कृति की मूल भावना, धार्मिक सहिष्णुता तथा सर्वधर्म समभाव के सिद्धांत को स्पष्ट करता है।
इसमें यह प्रतिपादित किया गया है कि समस्त विश्व का सृष्टिकर्ता एक ही परमात्मा है और विभिन्न धर्मों में उसी एक सत्य की विविध नामों एवं रूपों में उपासना की जाती है।

अनुवाद: “विश्व का सृष्टिकर्ता ईश्वर एक ही है” — यही भारतीय संस्कृति का मूल सिद्धांत है।
विभिन्न मतों को मानने वाले लोग भिन्न-भिन्न नामों से उसी एक ईश्वर की उपासना करते हैं।
कोई उसे अग्नि कहता है, कोई इन्द्र, कोई कृष्ण, कोई करीम, कोई राम, कोई रहीम, कोई जिन, कोई बुद्ध, कोई ख्रिस्त और कोई अल्लाह कहता है।
ये सभी नाम उसी एक परमात्मा के हैं।
लोग उसी एक ईश्वर को गुरु के रूप में भी मानते हैं।
इसलिए सभी मतों के प्रति समान भाव और सम्मान रखना ही हमारी संस्कृति का संदेश है।

व्याख्या: इस गद्यांश में भारतीय संस्कृति की उदारता और व्यापक दृष्टिकोण का वर्णन किया गया है।
भारतीय परंपरा में “एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति” की भावना निहित है, जिसका अर्थ है कि सत्य एक है, परंतु ज्ञानीजन उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।
यही कारण है कि भारत में अनेक धर्मों, पंथों और विचारधाराओं का सहअस्तित्व संभव हुआ है।

लेखक यह स्पष्ट करता है कि नामों और उपासना-पद्धतियों में भिन्नता होने पर भी ईश्वर एक ही है।
अतः हमें संकीर्णता, भेदभाव और असहिष्णुता को त्यागकर सभी मतों का आदर करना चाहिए।
भारतीय संस्कृति का मुख्य संदेश ही यह है कि सभी धर्मों में समानता और सम्मान की भावना रखी जाए।

निष्कर्ष: इस प्रकार प्रस्तुत गद्यांश भारतीय संस्कृति के उस महान सिद्धांत को प्रतिपादित करता है, जिसमें ईश्वर की एकता, धार्मिक सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का आदर्श निहित है।
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