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सार्थ: प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए) 
 

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'सार्थ:' का अर्थ है यात्रियों का समूह या सहयात्री।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक नीति-साहित्य से संबंधित है, जिसमें जीवन के विभिन्न अवस्थाओं में सच्चे मित्र की पहचान का वर्णन किया गया है। कवि यह स्पष्ट करता है कि परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य के लिए सहायक और हितैषी व्यक्ति बदलते रहते हैं।

अनुवाद: यात्रा पर जाने वाले व्यक्ति का मित्र उसका सहयात्री (सार्थ) होता है, और जो व्यक्ति घर में रहता है, उसका सच्चा मित्र उसकी पत्नी होती है।

व्याख्या: इस श्लोक में ‘सार्थ’ का अर्थ है — साथ चलने वाला या सहयात्री। जब कोई व्यक्ति विदेश या यात्रा पर जाता है, तब उसके लिए वही व्यक्ति मित्र होता है जो मार्ग में उसका साथ देता है, सहायता करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
इसी प्रकार जो व्यक्ति अपने घर में रहता है, उसके लिए उसकी पत्नी ही सच्ची मित्र होती है, क्योंकि वह सुख-दुःख में साथ निभाती है, घर का संचालन करती है और हर परिस्थिति में सहयोग देती है।

कवि का अभिप्राय यह है कि मित्रता का मूल्य परिस्थिति के अनुसार समझना चाहिए। सच्चा मित्र वही है जो समय और स्थिति के अनुरूप साथ दे तथा सहायक बने।

निष्कर्ष: इस श्लोक के माध्यम से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन की प्रत्येक अवस्था में वही व्यक्ति हमारा सच्चा मित्र है, जो हमारे साथ खड़ा रहता है और कठिन समय में सहयोग प्रदान करता है।
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