Question:medium

ताडित: चन्द्रशेखर: पुन: पुन: 'भारतं जयतु' इति वदति। (एवं स पञ्चदशकशाघातै: ताडित:) यदा चन्द्रशेखर: कारागारात् मुक्त: बहि: आगच्छति, तदैव सर्वे जना: तं परित: वेष्टयन्ति, बहव: बालका: तस्य पादयो: पतन्ति, तं मालाभि: अभिनन्दयन्ति च। (सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए) 
 

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'परित:' शब्द का अर्थ 'चारों ओर' और 'वेष्टयन्ति' का अर्थ 'घेर लेते हैं' होता है।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश एक वीर देशभक्त के साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम का वर्णन करता है। इसमें उस प्रसंग का चित्रण है जब चन्द्रशेखर नामक वीर को दण्डित किया जाता है, परन्तु वह कष्ट सहते हुए भी अपने राष्ट्रप्रेम से विचलित नहीं होता।

अनुवाद: बार-बार प्रहार किए जाने पर भी चन्द्रशेखर बार-बार “भारतं जयतु” अर्थात् “भारत की जय हो” कहता रहता है।
उसे पन्द्रह बेंतों (कोड़ों) से मारा गया, फिर भी उसके मुख से राष्ट्रजय का उद्घोष ही निकलता रहा।

जब चन्द्रशेखर कारागार से मुक्त होकर बाहर आता है, तभी सभी लोग उसे चारों ओर से घेर लेते हैं।
अनेक बालक उसके चरणों में गिर पड़ते हैं और लोग उसे मालाओं से सम्मानित करते हैं।

व्याख्या: इस प्रसंग में चन्द्रशेखर के अटूट साहस और देशभक्ति का प्रभावशाली चित्रण है। कठोर दण्ड और शारीरिक पीड़ा के बावजूद वह अपने राष्ट्रप्रेम से तनिक भी विचलित नहीं होता। उसका “भारतं जयतु” का उद्घोष उसके अदम्य आत्मबल और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
कारागार से बाहर आने पर जनता द्वारा किया गया उसका सम्मान यह दर्शाता है कि समाज ऐसे वीरों को अत्यंत आदर की दृष्टि से देखता है।

निष्कर्ष: इस गद्यांश में चन्द्रशेखर की वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति का उज्ज्वल चित्र प्रस्तुत किया गया है, जो पाठकों में देशप्रेम और साहस की भावना जाग्रत करता है।
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