चरण 1: प्रश्न का दूसरा विकल्प:
इस उत्तर में शान्त रस का लक्षण और उदाहरण दिया जा रहा है।
चरण 2: परिभाषा:
जहाँ संसार के प्रति विरक्ति, मन की शांति और परमात्मा में लगाव का वर्णन हो, वहाँ शान्त रस होता है। जब निर्वेद नामक स्थायी भाव विभाव, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट हो जाए, तब यह रस उत्पन्न होता है।
चरण 3: उदाहरण:
अब लौं नसानी अब न नसैहौं।
रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिरि न डसैहौं॥
चरण 4: व्याख्या:
तुलसीदास ‘विनयपत्रिका’ में कहते हैं कि अब तक का जीवन व्यर्थ गया, पर अब वे उसे नष्ट नहीं होने देंगे। राम की कृपा से संसार-रूपी रात बीत गई है, वे जाग गए हैं और अब माया उन्हें नहीं डस सकेगी। राम का नाम और भक्ति आलंबन हैं। संसार से विरक्ति अनुभाव है। मति और धृति संचारी भाव हैं। निर्वेद पुष्ट होता है।
निष्कर्ष:
अतः यह शान्त रस का उदाहरण है।