वैकल्पिक उत्तर (करुण रस):
इष्ट वस्तु के नाश, प्रियजन के वियोग अथवा विपत्ति के कारण उत्पन्न शोक नामक स्थायी भाव जब रस-रूप में परिणत होता है, उसे करुण रस कहते हैं।
उदाहरण:
राम के वनगमन पर पुत्र-वियोग से व्याकुल राजा दशरथ का विलाप — "हा राम! हा राम!" कहते हुए प्राण त्यागना — करुण रस का उत्कृष्ट उदाहरण है।