वैकल्पिक उदाहरण-सहित स्पष्टीकरण:
शृंगार को 'रसराज' भी कहा जाता है, क्योंकि यह सर्वाधिक व्यापक रूप से काव्य में प्रयुक्त होता है। उदाहरणस्वरूप — "मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय। जा तन की झाँई परे, स्याम हरित दुति होय॥" इसमें राधा-कृष्ण के प्रेम-भाव का चित्रण होने से शृंगार रस की स्पष्ट प्रतीति होती है।