Step 1: संक्षिप्त पुनःकथन:
रौद्र रस वह रस है जिसमें क्रोध के स्थायी भाव का आस्वादन होता है। यह शत्रु के प्रति अपमान, अन्याय अथवा वैर-भाव से उत्पन्न होता है। उदाहरण: महाभारत में द्रौपदी-चीरहरण के समय भीम की क्रोधपूर्ण प्रतिज्ञा — 'दुःशासन की छाती का रक्त पीकर ही चैन लूँगा' जैसे प्रसंग रौद्र रस के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
Final Answer:
यह परिभाषा इसकी पहचान हेतु पर्याप्त है।