चरण 1: प्रश्न की माँग:
दो में से एक रस लिखना है। इस पृष्ठ पर शृंगार रस का उत्तर है, क्योंकि वह प्रश्न में दूसरे स्थान पर आया है।
चरण 2: शृंगार रस का स्वरूप:
शृंगार रस को रसराज कहा जाता है। स्त्री-पुरुष के प्रेम से जुड़ा रति नामक स्थायी भाव जब आलंबन, उद्दीपन, अनुभाव और संचारी भावों से पुष्ट होता है, तब शृंगार रस बनता है। मिलन में यह संयोग शृंगार और बिछोह में वियोग शृंगार कहलाता है।
चरण 3: वियोग शृंगार का उदाहरण:
हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥
चरण 4: व्याख्या:
सीता के हरण के बाद राम वन में पक्षियों, हिरनों और भौंरों से पूछते फिरते हैं कि क्या तुमने मृगनयनी सीता को देखा है। यहाँ सीता आलंबन हैं और वन का एकांत उद्दीपन है। राम का पूछना और व्याकुल घूमना अनुभाव है। स्मृति, चिंता और उन्माद संचारी भाव हैं। इनसे राम की रति पुष्ट होती है।
निष्कर्ष:
अतः यह वियोग शृंगार रस का उदाहरण है।