चरण 1: चुना हुआ रस:
इस उत्तर में विकल्प का दूसरा रस ‘शृंगार रस’ लिखा गया है।
चरण 2: शृंगार रस क्या है:
नायक-नायिका के प्रेम, सौन्दर्य, मिलन या बिछोह का वर्णन जब सहृदय के मन में रति भाव जगाता है और वह विभाव, अनुभाव तथा संचारी भावों से परिपुष्ट होता है, तब शृंगार रस होता है। इसे रसराज भी कहते हैं। इसका स्थायी भाव रति है।
चरण 3: भेद:
इसके दो भेद हैं: संयोग शृंगार और वियोग (विप्रलम्भ) शृंगार।
चरण 4: उदाहरण (संयोग शृंगार):
कहत नटत रीझत खिझत, मिलत खिलत लजियात।
भरे भौन में करत हैं, नैननु ही सौं बात॥
(बिहारी)
चरण 5: उदाहरण से मेल:
नायक कहता है, नायिका मना करती है। वे रीझते और खीझते हैं, मिलते हैं, खिल उठते हैं और लजाते हैं। भरे घर में दोनों आँखों से ही बातें करते हैं।
आलम्बन: नायक और नायिका।
अनुभाव: कहना, नटना, लजाना, नेत्रों से बात करना।
संचारी भाव: हर्ष, लज्जा, चपलता।
स्थायी भाव: रति।
अंतिम उत्तर:
रति स्थायी भाव वाला शृंगार रस है, और बिहारी का यह दोहा उसका उदाहरण है।