चरण 1: इस उत्तर का रस:
‘शांत अथवा हास्य’ में से इस पृष्ठ पर दूसरा रस, हास्य रस, लिखा गया है।
चरण 2: परिभाषा:
जहाँ किसी की अनोखी आकृति, वाणी, वेश या क्रिया देखकर हृदय में हँसी उमड़े और वह अपने सहायक भावों के साथ पूर्ण हो जाए, वहाँ हास्य रस होता है। हास इसका स्थायी भाव है।
चरण 3: उदाहरण:
तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेमप्रताप,
साज मिले पन्द्रह मिनट घंटा भर आलाप।
घंटा भर आलाप, राग में मारा गोता,
धीरे-धीरे खिसक चुके थे सारे श्रोता॥
चरण 4: उदाहरण की जाँच:
गायक साज मिलाने में पंद्रह मिनट लगाता है और आलाप एक घंटे तक खींचता है। इस बीच सारे श्रोता चुपचाप उठकर चले जाते हैं। गायक और उसका बेसुरा लंबा आलाप आलंबन है। श्रोताओं का खिसकना उद्दीपन है। पढ़ने वाले का हँसना अनुभाव है। हर्ष और चपलता संचारी भाव हैं।
निष्कर्ष:
यह हास्य रस का उदाहरण है, जिसका स्थायी भाव हास है।