Question:easy

'वीर' रस अथवा 'हास्य' रस की परिभाषा सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

चरण 1: चुना गया रस:
इस उत्तर में प्रश्न में बाद में दिए गए हास्य रस को समझाया गया है।

चरण 2: लक्षण:
किसी व्यक्ति की विचित्र वेशभूषा, बोली, चेष्टा या बेतुकी बात देखकर-सुनकर मन में जो हँसी का भाव जागता है, वह विभाव आदि से पुष्ट होकर हास्य रस बन जाता है। इसका स्थायी भाव हास है।

चरण 3: उदाहरण:
बुरे समय को देखकर गंजे तू क्यों रोय।
किसी भी हालत में तेरा बाल न बाँका होय॥

चरण 4: रस की पहचान:
आलंबन गंजा व्यक्ति है, जिसके सिर पर बाल ही नहीं हैं। उसे यह कहकर ढाढ़स बँधाना कि तेरा बाल भी बाँका नहीं होगा, हँसी पैदा करता है। यही उद्दीपन है। पाठक का मुसकराना और हँस पड़ना अनुभाव है। चपलता और उत्सुकता संचारी भाव हैं। स्थायी भाव हास पुष्ट होता है।

निष्कर्ष:
अतः यह हास्य रस का उदाहरण है।
Was this answer helpful?
0