Question:easy

'करुण रस' अथवा 'शृंगार रस' का लक्षण और उदाहरण लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को समझें:
‘करुण अथवा शृंगार’ में से इस उत्तर में दूसरे रस, शृंगार रस, को लिखा गया है।

चरण 2: परिभाषा और भेद:
नायक और नायिका के परस्पर प्रेम का वर्णन जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के साथ पूर्ण रूप से हो, तब शृंगार रस होता है। इसका स्थायी भाव रति है। इसके दो भेद हैं: संयोग शृंगार और वियोग शृंगार। जहाँ प्रेमी-प्रेमिका के मिलन का चित्रण हो, वह संयोग शृंगार है।

चरण 3: उदाहरण (संयोग शृंगार):
बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाइ।
सौंह करै भौंहनि हँसै, दैन कहै नटि जाइ॥

चरण 4: उदाहरण का स्पष्टीकरण:
गोपी कृष्ण से बातें करने के लोभ में उनकी मुरली छिपा देती है। मुरली माँगने पर वह सौगंध खाती है, भौंहों से हँसती है और देने को कहकर मुकर जाती है। आलंबन कृष्ण और गोपी हैं। भौंहों का हँसना और मुरली छिपाना अनुभाव हैं। हर्ष, चपलता और औत्सुक्य संचारी भाव हैं। इन सबसे रति भाव पुष्ट होता है।

निष्कर्ष:
बिहारी की इस पंक्ति में संयोग शृंगार रस है।
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