Question:medium

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 
‘‘पुर्ज़े खोलकर फिर ठीक करना उतना कठिन काम नहीं है, लोग सीखते भी हैं, सिखाते भी हैं, अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो पर जो घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास कर आया है उसे तो देखने दो । साथ ही यह भी समझा दो कि आपको स्वयं घड़ी देखना, साफ़ करना और सुधारना आता है कि नहीं । हमें तो धोखा होता है कि परदादा की घड़ी जेब में डाले फिरते हो, वह बंद हो गई है, तुम्हें न चाबी देना आता है न पुर्ज़े सुधारना तो भी दूसरों को हाथ नहीं लगाने देते इत्यादि ।’’ 
 

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‘घड़ी’ शब्द को प्रतीक मानकर उत्तर लिखें — यह परंपरा या सांस्कृतिक धरोहर का रूपक है। विचार करें कि लेखक किसके विरोध में और किसके पक्ष में बोल रहा है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

सप्रसंग व्याख्या:
यह गद्यांश ‘अपना मालवा...’ पाठ से उद्धृत है, जिसमें लेखक अज्ञेय ने प्रतीकात्मक शैली में परंपरा और आधुनिकता के संघर्ष पर विचार व्यक्त किए हैं।
यहाँ ‘घड़ी’ परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है, और ‘घड़ी सुधारना’ का तात्पर्य है उसमें आवश्यक बदलाव करना। लेखक का तर्क है कि यदि किसी ने ‘घड़ीसाज़ी’ (नवाचार) का कौशल प्राप्त किया है, तो उसे परंपरा को सुधारने का अधिकार मिलना चाहिए।
लेखक यह भी बताते हैं कि कई लोग केवल परंपरा का बोझ ढोते हैं (जैसे पुरानी घड़ी), न तो वे उसे बदलते हैं और न ही दूसरों को बदलने देते हैं। यह परिवर्तन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक है।
गद्यांश का सार यह है कि परंपराओं का महत्व तभी है जब वे प्रासंगिक, उपयोगी और सार्थक हों, न कि केवल याद के रूप में संरक्षित की जाएँ।
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