Question:medium

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 
ऊँचे टक्कर से गिरे 
बड़े-बड़े पियाय पत्ते 
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो – 
खिली हुई हवा आई, फिकी-सी आई, चली गई। 
ऐसे, फुटपाथ पर चलते चलते चलते। 
कल मैंने जाना कि वसंत आया। 
और यह कैलेंडर से मालूम था 
अमुक दिन अमुक बार मधुमहीने की होगी पंचमी 
दफ़्तर में छुट्टी थी – यह था प्रमाण 
और कविताएँ पढ़ते रहने से यह पता था 
कि दहक-दहक दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल 
आम बौर आएँगे 
रंग रस-गंध से लदे-फँदे दूर के विदेश के 
वे नंदन-वन होंगे यशस्वी 
मधुमस्त पिक भौर आदि अपना-अपना कृतित्व 
अवश्य करके दिखाएँगे 
यही नहीं जाना था कि आज के नगण्य दिन जानूँगा 
जैसे मैंने जाना, कि वसंत आया। 
 

Show Hint

इस प्रकार की आधुनिक कविता की व्याख्या करते समय शिल्प, प्रतीक, अनुभवगत संवेदना और भाषा की नवीनता को अवश्य रेखांकित करें।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

प्रसंग: यह काव्यांश आधुनिक हिंदी कविता का एक उत्तम उदाहरण है, जिसमें कवि वसंत ऋतु के आगमन की अनुभूति को सरल और वास्तविक जीवन के संदर्भों से जोड़ता है। यह कविता प्रकृति के बदलाव और उसके प्रभाव को आम लोगों के नजरिए से महसूस करने का प्रयास है।
व्याख्या: कवि ने वसंत के आगमन को पारंपरिक प्रतीकों या धार्मिक भावनाओं से नहीं, बल्कि शहरी जीवन और साधारण अनुभवों से जोड़ा है। वह बताता है कि वसंत का अनुभव सुबह की हवा की गंध, धूप और फुटपाथ की धूल जैसा ही धीरे-धीरे हुआ। उसे ऋतु परिवर्तन का एहसास कैलेंडर या छुट्टियों से नहीं, बल्कि पेड़ों से गिरते पत्तों, किताबों की गंध और कविताओं से हुआ। वह कल्पना करता है कि अब आम पर बौर आएंगे, जंगलों में खुशबू और रंग होंगे, और विदेशी लेखक भी वसंत पर लिखेंगे। कवि का कहना है कि यह एक ऐसा दिन था जिसे उसने सामान्य समझा था, लेकिन वह असाधारण बन गया क्योंकि उसी दिन उसे 'वसंत' के आने का ज्ञान हुआ।
निष्कर्ष: यह कविता ऋतु-परिवर्तन की भावना को सांसारिक अनुभवों से जोड़ती है। कवि के अनुसार, वसंत केवल मौसम या परंपरा की याद नहीं है, बल्कि अनुभव की एक नई लहर है, जो शहरी जीवन में भी प्रकट होती है। इस कविता की मुख्य विशेषता इसकी सहजता, आधुनिकता और अनुभव से जुड़ाव है।
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