Question:medium

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : यह वह विश्वास, नहीं जो अपनी लघुता में भी काँपा, 
वह पीड़ा, जिस की गहराई को स्वयं उसी ने नापा; 
कुत्सा, अपमान, अवज्ञा के धुँधुआते कडुवे तम में 
यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक, अनुरक्त-नेत्र, 
उल्लंब बाहु, यह चिर-अखंड अपनापा। 
जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो – 
यह दीप, अकेला, स्नेह भरा 
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।

Show Hint

सप्रसंग व्याख्या करते समय कवि की मनोवस्था, प्रतीकों का अर्थ और काव्य का संदेश स्पष्ट रूप से व्याख्यायित करें। अज्ञेय की कविताएँ आधुनिक संवेदना, आत्मनिरीक्षण और सामाजिक चेतना का सुंदर मेल होती हैं।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

यह अंश अज्ञेय की कविता से लिया गया है, जो दीपक को एक ऐसे व्यक्ति का प्रतीक बनाता है जो त्याग, समर्पण और जागरूकता से परिपूर्ण है। यह व्यक्ति जीवन भर संघर्ष करता है लेकिन फिर भी समाज को प्रकाशित करता है। प्रसंग:
यह पंक्तियाँ उस स्थिति को दर्शाती हैं जहाँ समाज ऐसे व्यक्तियों को अनदेखा करता है जो दूसरों के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं, भले ही वे दुःख सहते हों। कवि चाहता है कि ऐसे समर्पित व्यक्तियों को केवल श्रद्धा ही नहीं, बल्कि समाज में सम्मान भी मिले। व्याख्या:
कवि का कहना है कि यह विश्वास कमजोर नहीं है — यह अटल है, चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो।
यह दुख सहता है, और इसकी गहराई को व्यक्ति स्वयं महसूस करता है — अर्थात यह आत्म-जागरूकता से परिपूर्ण है।
यह व्यक्ति अपमान, उपेक्षा और आलोचना के बावजूद कोमल, सावधान, प्रेममय और समर्पित बना रहता है।
उसकी आँखें प्रेममय, बाँहें फैली हुई दूसरों को अपनाने के लिए तत्पर हैं — यह चिरस्थायी प्रेम का प्रतीक है।
कवि कहता है कि यह दीपक अकेला, लेकिन स्नेह से भरपूर है और गर्व के बावजूद यह सहयोग की भावना में शामिल होने को तैयार है।
निष्कर्ष:
यह दीपक उन लोगों का प्रतीक है जो जीवन भर संघर्षों और उपेक्षा के बीच जीते हुए भी समाज के लिए योगदान देते हैं। कवि अज्ञेय का संदेश स्पष्ट है — ऐसे व्यक्तियों को केवल श्रद्धांजलि या स्मृति में नहीं, बल्कि सामाजिक मान्यता और सक्रिय भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।
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