Question:medium

हा! रघुनन्दन प्रेम परांते। तुम बिन जियत बहुत दिन बीते।। उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है

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करुण रस की पहचान हेतु 'हा!', 'विशाल', 'रोदन', 'शोक' जैसे शब्दों पर ध्यान दें।
Updated On: Feb 19, 2026
  • वीर रस
  • हास्य रस
  • करुण रस
  • रौद्र रस
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

विश्लेषण: प्रस्तुत पंक्तियाँ “हा! रघुनन्दन प्रेम परांते। तुम बिन जियत बहुत दिन बीते।।’’ अत्यंत मार्मिक भावों को व्यक्त करती हैं।
इन पंक्तियों में विरह, पीड़ा और करुण भाव की स्पष्ट अनुभूति होती है।
“हा!” जैसे शब्द से हृदय की वेदना और गहन दुःख का भाव प्रकट होता है, जो शोक एवं व्यथा का सूचक है।

रस सिद्धांत के अनुसार जब किसी काव्यांश में शोक, विलाप, विरह या दुःख की भावना प्रमुख रूप से व्यक्त होती है, तब वहाँ करुण रस की अभिव्यक्ति मानी जाती है।
करुण रस का स्थायी भाव ‘शोक’ होता है और इसके उद्दीपन, अनुभाव तथा संचारी भावों के माध्यम से पाठक के मन में करुणा एवं संवेदना उत्पन्न होती है।

यहाँ प्रिय के वियोग में जीवन के लंबे समय के बीत जाने का उल्लेख किया गया है, जो विरहजनित पीड़ा को दर्शाता है।
कवि के हृदय की वेदना और भावुकता पाठक को भी द्रवित कर देती है।

निष्कर्ष: अतः उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस करुण रस है।
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