‘दूसरा देवदास’ कहानी के आधार पर लिखिए कि संभव की नानी उसको लेकर क्यों चिंतित हो गईं । इस तरह का व्यवहार बुज़ुर्गों के स्वभाव के किन पक्षों को उजागर करता है ?
कहानी को रोचक बनाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है ? पढ़ी हुई किसी कहानी के उदाहरण से अपनी बात स्पष्ट कीजिए।
सबसे पहले कविता शब्दों से खेलने का प्रयास है – कैसे ? सोदाहरण लिखिए।
कहानी में पात्रों का महत्त्व स्पष्ट करते हुए अपनी किसी पसंदीदा कहानी के प्रमुख पात्र की चर्चा करते हुए लिखिए कि कहानीकार ने उसकी रचना में किन बातों का विशेष ध्यान रखा है।
‘घड़ी के पुर्जे’ पाठ के संदर्भ में ‘घड़ीसाज़' को भी घड़ी खोलकर देखने की इज़ाज़त न देने का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए लिखिए कि इसका क्या दुष्परिणाम होगा।
‘दूसरा देवदास’ कहानी के आधार पर लिखिए कि संभव संध्या की आरती से लौटकर अनमना सा क्यों था। उसकी अवस्था का चित्रण करते हुए कारण लिखिए।
एक सशक्त नाटक किन तत्त्वों की उपस्थिति से बनता है? सोदाहरण लिखिए।
कहानी के केंद्रीय बिंदु को स्पष्ट करते हुए लिखिए कि कहानी-लेखन में किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
किसी भी कहानी के चरम उत्कर्ष या क्लाइमैक्स से आप क्या समझते हैं? उसका होना आवश्यक क्यों है? दो बिंदुओं में लिखिए।
‘बिसनाथ दूध कटहा हो गए। उनका दूध कट गया।’ — इस कथन का आशय स्पष्ट करते हुए बिसनाथ के जीवन में आए संकट का स्वरूप स्पष्ट कीजिए। इस कथन के आलोक में आप बिसनाथ के प्रति कैसा महसूस करते हैं? संक्षेप में लिखिए।
झोंपड़ी जलाए जाने के बाद भी सूरदास का किसी से प्रतिशोध न लेना, उसके स्वभाव की किस विशेषता को दर्शाता है? सूरदास जैसे चरित्र की वर्तमान समय में क्या प्रासंगिकता है?
हरगोबिन एक संवदिया था पर उसने अपना काम पूरा नहीं किया। ‘संवदिया’ कहानी के आधार पर लिखिए कि उसने ऐसा क्यों किया।
कहानी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा क्यों है ? अपने अनुभव की किसी कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
‘साँवरा’ कहानी में ‘बाँधी’ किसका प्रतीक है ? इस चरित्र के माध्यम से लेखक ने किस सत्य को उजागर किया है ?
कहानी का हमारे जीवन से क्या संबंध है? वर्णन कीजिए।