Question:medium

‘जो है वह सुलगाता है। जो नहीं है वह फेंकने लगता है पचाखियाँ’ — पंक्ति के सन्दर्भ में ‘सुलगाने’ और ‘पचाखियाँ फेंकने’ का आशय स्पष्ट कीजिए। 
 

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कविता में क्रियाओं के प्रतीकात्मक अर्थ निकालना अनिवार्य होता है — विशेषकर जब वे भावनात्मक या बौद्धिक द्वंद्व को दर्शाती हैं।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

इस पंक्ति में प्रतीकात्मक भाषा का उपयोग किया गया है। 'जो है वह सुलगाता है' का मतलब है कि जो सोचता है, महसूस करता है, वह अंदर ही अंदर संघर्ष करता है, पीड़ा झेलता है। वह सृजन की कठिनाई से गुजरता है। जबकि 'जो नहीं है', यानी जो खाली है, ज्ञानी नहीं है, वह सिर्फ शोर करता है, दिखावा करता है। 'पचाखियाँ फेंकने' का अर्थ है दिखावटी प्रदर्शन, केवल मौजूदगी दर्ज कराना। यह अंतर दर्शाता है कि गहरे लोग अंदर से 'जलते' हैं, जबकि खोखले लोग बाहरी शोर में खोए रहते हैं।
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