Question:medium

‘‘सरोज-स्मृति’’ कविता के आधार पर लिखिए कि सरोज का विवाह करते समय निराला जी को ‘शकुंतला’ का स्मरण क्यों हो आया? 
 

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साहित्यिक स्मरणों के पीछे अक्सर लेखक का गहरा निजी अनुभव और प्रतीकात्मक दृष्टिकोण छुपा होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

‘सरोज-स्मृति’ कविता में, निराला जी ने अपनी बेटी सरोज के प्रति गहन प्रेम, दया और जागरूकता व्यक्त की है। सरोज की शादी के दौरान, उन्हें महाकाव्य ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ की नायिका शकुंतला की याद आई। इसका गहरा मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व है।
(1) शकुंतला और सरोज दोनों बचपन से ही स्नेह, सादगी और अच्छे आचरण से पोषित थीं।
(2) जिस तरह शकुंतला को दुष्यंत से अलग होने के बाद अपने पिता, आश्रम और जीवन से दूर जाना पड़ा, उसी तरह सरोज का विवाह भी निराला जी के लिए "वियोग" का पल था।
(3) निराला को पहले ही लग गया था कि शादी के बाद सरोज का जीवन केवल खुशहाल नहीं रहेगा – उसमें संघर्ष, पीड़ा और चुनौतियों की संभावना भी है।
(4) शकुंतला का विवाह भी रीति-रिवाजों, सामाजिक अंतर और समय के विरोधाभासों से प्रभावित था - ठीक वैसे ही जैसे सरोज का जीवन बाद में दुख से भरा रहा।
(5) यह स्मरण केवल साहित्यिक नहीं है, बल्कि एक पिता के मन की आशंका, चिंता और भावनात्मक उथल-पुथल का संकेत है।
निष्कर्ष: निराला के लिए सरोज सिर्फ एक बेटी नहीं थीं, बल्कि आदर्श नारीत्व का प्रतीक थीं। उनकी 'शकुंतला' से तुलना करना, उनके अच्छे आचरण, सुंदरता और जीवन की कठिनाइयों में उनकी आंतरिक समानता को दर्शाता है।
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