चरण 1: शाब्दिक चित्र:
ओखली में कोई अपना सिर रख दे और ऊपर से मूसल चले, तो सिर का बचना कठिन है। यही चित्र इस मुहावरे में है।
चरण 2: लाक्षणिक अर्थ:
जब कोई व्यक्ति जानते हुए भी ऐसे काम में हाथ डाल दे, जिसमें हानि या कष्ट निश्चित हो, तब कहा जाता है कि उसने ओखली में सिर दिया।
चरण 3: उदाहरण:
1. तूफान में नाव लेकर निकलना ओखली में सिर देना ही था।
2. जब ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरना, यह सोचकर वह पूरे साहस से आगे बढ़ा।
निष्कर्ष:
यह मुहावरा जानबूझकर खतरा मोल लेने के लिए बोला जाता है।