Question:medium

दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिये:
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षिव्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भास-भारवि-भवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नैः अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते । इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं गौरवम् अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वञ्च संस्कृतेनैव सुरक्षितुं शक्यन्ते ।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह अंश ‘संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्’ नामक पाठ का है, जो ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ में दिया गया है। लेखक यहाँ संस्कृत के कवियों की कीर्ति और संस्कृत की राष्ट्रीय उपयोगिता बताता है।

चरण 2: कठिन शब्द:
पाठकानां हृदि = पाठकों के हृदय में। अद्यापि = आज भी। अस्माभिः = हमारे द्वारा। सम्माननीया = आदर के योग्य। वन्दनीया = प्रणाम करने योग्य। सांस्कृतिकमेकत्वम् = संस्कृति की एकता। सुरक्षितुं शक्यन्ते = सुरक्षित किए जा सकते हैं।

चरण 3: अनुवाद:
1. संस्कृत साहित्य के पहले कवि वाल्मीकि, महर्षि व्यास और कवियों के गुरु कालिदास, साथ ही भास, भारवि और भवभूति जैसे दूसरे महाकवि आज भी अपनी अनमोल रचनाओं के कारण पाठकों के मन में बसे हैं।
2. हमें इस भाषा का माँ की तरह सम्मान और वन्दन करना चाहिए, क्योंकि देश की आज़ादी, गौरव, अखण्डता और सांस्कृतिक एकता संस्कृत के द्वारा ही सुरक्षित रह सकती है।

चरण 5: भावार्थ:
संस्कृत केवल साहित्य की भाषा नहीं, देश की एकता की भी आधार है।
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