Question:medium

दिये गये संस्कृत गद्यांश का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च, यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं, गौरवम्, अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वञ्च संस्कृतेनैव सुरक्षितुं शक्यन्ते । इयं संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठा चास्ति । ततः सुष्ठुक्तम् 'भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाणभारती' इति ।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग और पाठ का नाम:
यह अंश उत्तर प्रदेश बोर्ड की कक्षा 12 की ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ में संकलित पाठ ‘संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्’ का है। पाठ में संस्कृत की महिमा और उसकी उपयोगिता बताई गई है।

चरण 2: कठिन शब्दों के अर्थ:
यतः = क्योंकि। भारतमातुः = भारतमाता की। स्वातन्त्र्यम् = स्वतन्त्रता। गौरवम् = मान-सम्मान। सांस्कृतिकम् एकत्वम् = सांस्कृतिक एकता। शक्यन्ते = सम्भव हैं। श्रेष्ठा = सबसे अच्छी। सुष्ठु उक्तम् = भली प्रकार कहा गया।

चरण 3: वाक्य-दर-वाक्य अनुवाद:
1. हम सबको इस भाषा का आदर माँ की तरह करना चाहिए और इसकी वन्दना करनी चाहिए।
2. इसका कारण है कि भारतमाता की आज़ादी, उसका गौरव, उसकी अखण्डता तथा उसकी संस्कृति की एकता संस्कृत के द्वारा ही बचाई जा सकती है।
3. सारी भाषाओं में संस्कृत सबसे पुरानी और सर्वश्रेष्ठ भाषा है।
4. इसीलिए किसी ने उचित कहा है: भाषाओं में प्रधान, मीठी और दिव्य भाषा देवताओं की वाणी ही है।

चरण 4: भावार्थ:
लेखक का आशय है कि संस्कृत को माता का दर्जा देना चाहिए, क्योंकि उसी में हमारी परम्परा और राष्ट्रीय एकता का आधार है।
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