चरण 1: मुहावरे की बनावट:
पुराने समय में पीतल के बर्तनों पर चमक के लिए कलई (रांगे की परत) चढ़ाई जाती थी। परत उतरते ही बर्तन की असली हालत दिख जाती है।
चरण 2: अर्थ:
इसीलिए ‘कलई खुलना’ का अर्थ है: किसी का दिखावा या झूठा रूप समाप्त होकर उसका असली रूप प्रकट हो जाना।
चरण 3: उदाहरण वाक्य:
खुद को बहुत बड़ा विद्वान बताने वाले वक्ता की कलई पहले ही प्रश्न पर खुल गई, क्योंकि उसे उत्तर नहीं आता था।
निष्कर्ष:
यह मुहावरा झूठे दिखावे के उजागर होने के लिए प्रयुक्त होता है।