चरण 1: भाव:
जब कोई बहुत शर्मिंदा होता है तो लगता है कि वह शर्म से पानी बन जाएगा। इसी कल्पना से यह मुहावरा बना है।
चरण 2: अर्थ:
इसका अर्थ है: अपनी भूल या अपराध के कारण अत्यंत लज्जा का अनुभव करना।
चरण 3: उदाहरण वाक्य:
जब सेठ जी का चोरी का झूठा आरोप गलत निकला, तो वे उन सबके सामने पानी-पानी हो गए जिन पर उन्होंने आरोप लगाया था।
निष्कर्ष:
यह मुहावरा गहरी शर्मिंदगी के भाव के लिए प्रयोग होता है।