चरण 1: चुना हुआ छन्द:
इस उत्तर में दूसरे छन्द, ‘दोहा’, की परिभाषा और उदाहरण दिए गए हैं।
चरण 2: परिभाषा:
दोहा अर्द्धसम मात्रिक छन्द है, जिसकी दो पंक्तियों में कुल चार चरण होते हैं। विषम चरणों (पहले, तीसरे) में 13 मात्राएँ और सम चरणों (दूसरे, चौथे) में 11 मात्राएँ होती हैं। सम चरणों के अन्त में लघु आता है।
चरण 3: उदाहरण:
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥
(कबीरदास)
चरण 4: मात्रा-गणना का प्रमाण:
पहली पंक्ति: बड़ा हुआ तो क्या हुआ = 13 मात्राएँ, जैसे पेड़ खजूर = 11 मात्राएँ।
दूसरी पंक्ति: पंथी को छाया नहीं = 13 मात्राएँ, फल लागे अति दूर = 11 मात्राएँ।
इस प्रकार 13 और 11 का क्रम ठीक बैठता है।
निष्कर्ष:
13-11 मात्राओं के क्रम वाला अर्द्धसम मात्रिक छन्द दोहा कहलाता है।