चरण 1: शाब्दिक और लाक्षणिक अर्थ:
शाब्दिक अर्थ है: सूर्य के सामने दीया जलाकर रखना। पर यह मुहावरा लाक्षणिक रूप में चलता है।
चरण 2: भावार्थ:
जहाँ कोई बात बहुत बड़ी हो और उसके सामने छोटा प्रयास दिखाया जाए, वहाँ यह मुहावरा आता है। इसका अर्थ है: योग्य व्यक्ति को उपदेश देना अनुचित और निष्फल है।
चरण 3: वाक्य बनाएँ:
1. कवि के सामने अपनी साधारण कविता सुनाना सूर्य को दीपक दिखाने जैसा है।
2. अनुभवी डॉक्टर को दवा का नाम बताना सूर्य को दीपक दिखाना ही होगा।
निष्कर्ष:
यह मुहावरा किसी बड़े के आगे छोटे प्रयास की व्यर्थता को बताता है।