चरण 1: छन्द का चयन:
इस पृष्ठ पर विकल्प का दूसरा छन्द, ‘दोहा’, समझाया गया है।
चरण 2: दोहे का लक्षण:
दोहा अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। इसमें दो पंक्तियाँ और चार चरण होते हैं। पहले और तीसरे (विषम) चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। दूसरे और चौथे (सम) चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। कुल 48 मात्राएँ होती हैं। सम चरणों के अन्त में लघु वर्ण आता है।
चरण 3: उदाहरण:
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुरै, जुरै गाँठ परि जाय॥
(रहीम)
चरण 4: मात्रा-जाँच:
रहिमन धागा प्रेम का = 13 मात्राएँ।
मत तोड़ो चटकाय = 11 मात्राएँ।
टूटे से फिर ना जुरै = 13 मात्राएँ।
जुरै गाँठ परि जाय = 11 मात्राएँ।
सम चरणों के अन्त में ‘य’ लघु है, इसलिए यह दोहा है।
अंतिम उत्तर:
13 और 11 मात्राओं के चरणों वाला अर्द्धसम छन्द दोहा है।