Comprehension

सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना

मैं पेंच को खोलने के बजाए

उसे बेतरह कसता चला जा रहा था

क्यों कि इस करतब पर मुझे

साफ़ सुनाई दे रही थी

तमाशबीनों की शाबाशी और वाह वाह !

आखिरकार वही हुआ जिसका मुझे डर था

ज़ोर ज़बरदस्ती से

बात की चूड़ी मर गई

और वह भाषा में बेकार घूमने लगी !

हार कर मैंने उसे कील की तरह

उसी जगह ठोंक दिया।

Question: 1

‘बात की चूड़ी मरना’ से क्या अभिप्राय है ?

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जैसे चूड़ी घिसने पर पेंच पकड़ नहीं बनाता, वैसे ही बात प्रभावहीन हो जाती है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • बात का पकड़ में न आना
  • बात का प्रभावहीन हो जाना
  • कथ्य और माध्यम का तालमेल होना
  • बात में कसाव और ताकत का होना
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: उपमा को पहचानना:
कवि ने बात की तुलना पेंच से की है। पेंच में गोल घुमावदार रेखाएँ होती हैं, जिन्हें चूड़ी कहते हैं। इन्हीं के सहारे पेंच लकड़ी या लोहे में कसकर बैठता है।

चरण 2: चूड़ी के मरने का अर्थ निकालना:
जब पेंच को बहुत ज़्यादा कस दिया जाता है, तो उसकी चूड़ी घिस जाती है। फिर वह पकड़ नहीं बनाता और बेकार घूमता रहता है। कविता में बात भी भाषा की उलझन में फँसकर बेकार घूमने लगती है, यानी अपना प्रभाव खो देती है।

चरण 3: विकल्पों को छाँटना:
विकल्प 3 और 4 सकारात्मक बात कहते हैं, जबकि कविता में नकारात्मक स्थिति है, इसलिए ये गलत हैं। विकल्प 1 में केवल पकड़ में न आने की बात है, पर कविता का आशय असर के खत्म होने से है। इसलिए विकल्प 2 बचता है।

अंतिम उत्तर:
बात की चूड़ी मरने का अर्थ है बात का अपना प्रभाव और तेज़ खो देना। उत्तर विकल्प 2 है।
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Question: 2

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : कथ्य के भाव या अभिव्यक्ति के अनुरूप ही भाषा का चुनाव करना चाहिए।

कारण : भाषा के शब्द-जाल में फँसकर कथ्य की जीवंतता और सार्थकता नष्ट हो जाती है।

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कविता का संदेश है कि कथ्य के अनुरूप भाषा चुनें, वरना भाषा के जाल में बात का असर खत्म हो जाता है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • कारण सही है, लेकिन कथन ग़लत है।
  • कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: विकल्पों को छाँटना:
कविता के अनुसार शब्दों का जाल बिछाने से बात का असर खत्म हो जाता है। इसलिए ‘कथन ग़लत है’ या ‘कारण ग़लत है’ कहने वाले विकल्प 1 और 2 उचित नहीं हैं।

चरण 2: दोनों वाक्यों को जोड़ना:
अब यह देखना है कि क्या कारण से कथन का समर्थन होता है। जब भाषा के जाल में कथ्य की जीवंतता मर जाती है, तभी यह सलाह दी जाती है कि कथ्य के अनुरूप भाषा चुनी जाए। अतः कारण कथन की गलत नहीं, सही व्याख्या करता है, और विकल्प 3 भी नहीं टिकता।

चरण 3: कविता से पुष्टि:
कवि ने पेंच को कसते-कसते उसकी चूड़ी मार दी और अंत में हारकर बात को कील की तरह ठोंक दिया। इस अनुभव से स्पष्ट है कि भाषा का सही चुनाव आवश्यक है।

अंतिम उत्तर:
दोनों कथन सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। उत्तर विकल्प 4 है।
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Question: 3

स्तंभ-I को स्तंभ-II से सुमेलित कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए :

स्तंभ-Iस्तंभ-II
1. पेंच खोलना(i) कथ्य के माध्यम को सरल बनाना
2. बेतरह कसना(ii) बात में कसावट का न होना
3. कील की तरह ठोंकना(iii) भाषा को अलंकृत करना

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पेंच खोलना = बात को सरल करना, बेतरह कसना = भाषा सजाना, कील की तरह ठोंकना = कसावट खो देना।
Updated On: Oct 27, 2026
  • 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
  • 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
  • 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: अर्थ पहले तय करना:
स्तंभ-II के तीनों कथनों के अर्थ देखिए। (i) कथ्य के माध्यम को सरल बनाना, (ii) बात में कसावट का न होना, (iii) भाषा को अलंकृत करना। अब काव्यांश की पंक्तियों से हर मुहावरे का भाव निकालना है।

चरण 2: काव्यांश की पंक्तियों से संकेत:
‘ज़ोर ज़बरदस्ती से बात की चूड़ी मर गई’ पंक्ति बताती है कि बात ढीली पड़ गई, उसमें कसावट नहीं रही। इसके बाद कवि उसे ‘कील की तरह ठोंक देता है’। अतः कील की तरह ठोंकना का मेल (ii) से बनता है।

चरण 3: शेष दो का मेल:
कवि ने वाह वाह की चाह में पेंच को बेतरह कसा, यानी भाषा को सजाने और चमत्कारी बनाने में लगा रहा, इसलिए बेतरह कसना (iii) से जुड़ता है। जो बचा, वह पेंच खोलना है; यह सुलझाने का काम है, अतः यह (i) कथ्य को सरल बनाना है।

चरण 4: उन्मूलन विधि से पुष्टि:
जिन विकल्पों में 3-(iii) है (विकल्प 1 और 2), वे गलत हैं। विकल्प 3 में 1-(iii) है, जो पेंच खोलने से मेल नहीं खाता। केवल विकल्प 4 बचता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (4) : 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)।
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Question: 4

कवि भाषा को और अधिक तराशने में क्यों लगा रहा ?

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काव्यांश की पंक्ति ‘तमाशबीनों की शाबाशी और वाह वाह’ में कारण लिखा है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • भाषा का महत्त्व न जानने के कारण
  • आत्म-संतुष्टि प्राप्त न होने के कारण
  • संप्रेषणीय शब्द न मिलने के कारण
  • लोगों से मिलने वाली प्रशंसा के कारण
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का अर्थ समझना:
प्रश्न पूछता है कि कवि भाषा को और अधिक तराशने में क्यों लगा रहा। यानी उसकी इस आदत के पीछे प्रेरणा क्या थी, इसे काव्यांश से ही निकालना है।

चरण 2: उन्मूलन विधि :
काव्यांश में कहीं नहीं लिखा कि कवि भाषा का महत्त्व नहीं जानता था, इसलिए विकल्प 1 कट जाता है। कवि के असंतुष्ट होने का भी उल्लेख नहीं है, इसलिए विकल्प 2 कट जाता है। शब्दों के न मिलने की कोई चर्चा नहीं है, इसलिए विकल्प 3 भी कट जाता है।

चरण 3: बचे हुए विकल्प की पुष्टि:
अब विकल्प 4 बचता है। काव्यांश की पंक्तियाँ ‘तमाशबीनों की शाबाशी और वाह वाह’ इसकी सीधी पुष्टि करती हैं। कवि दूसरों की तारीफ़ पाने के मोह में भाषा को और कसता गया।

चरण 4: परिणाम की ओर संकेत:
इसी मोह का परिणाम यह हुआ कि बात की चूड़ी मर गई और बात भाषा में बेकार घूमने लगी। यह भी बताता है कि कारण प्रशंसा की चाह ही थी।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (4) लोगों से मिलने वाली प्रशंसा के कारण।
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Question: 5

‘क्यों कि इस करतब पर मुझे’ – पंक्ति में किस करतब की बात हो रही है ?

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पेंच कसना यानी भाषा को ज़रूरत से ज़्यादा सजाना ही यहाँ करतब है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • भाषा को अलंकृत करने की
  • कथ्य को अलंकृत करने की
  • कविता पाठ करने की
  • पाठक और श्रोताओं को लुभाने की
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: ‘करतब’ शब्द का भाव:
‘करतब’ का अर्थ है कोई हुनर या कौशल जो दूसरों को चकित करने के लिए दिखाया जाता है। प्रश्न है कि काव्यांश में कवि कौन-सा कौशल दिखा रहा था।

चरण 2: क्रिया पर ध्यान देना:
कवि स्वयं कहता है कि वह पेंच को कसता जा रहा था। पेंच कथ्य को थामने वाली भाषा का प्रतीक है, जिसे वह ज़रूरत से ज़्यादा कस रहा था। यह भाषा के साथ की गई कारीगरी है।

चरण 3: उन्मूलन विधि :
कथ्य को अलंकृत करना विकल्प 2 में है, पर कथ्य सीधा-सादा था और बिगड़ी भाषा थी, इसलिए यह नहीं हो सकता। कविता पाठ का उल्लेख कहीं नहीं है। पाठक और श्रोताओं को लुभाना कवि का मनोरथ था, जिसके लिए उसने करतब किया; वह स्वयं करतब नहीं है।

चरण 4: निष्कर्ष:
इस तरह केवल पहला विकल्प बचता है, जो कसने की क्रिया के अर्थ से मेल खाता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (1) भाषा को अलंकृत करने की।
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Question: 6

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए :

कॉलम-Iकॉलम-II
1. बात का पेंच खोलना(i) बात का प्रभावहीन हो जाना
2. बात की चूड़ी मर जाना(ii) बात में कसावट का न होना
3. पेंच को कील की तरह ठोंक देना(iii) बात को सहज और स्पष्ट करना

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पेंच खोलना यानी बात स्पष्ट करना, चूड़ी मरना यानी बात प्रभावहीन होना और कील की तरह ठोंकना यानी कसावट न रहना।
Updated On: Oct 27, 2026
  • 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
  • 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
  • 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: पहले जोड़ से विकल्प छाँटना:
पेंच खोलना यानी उलझन सुलझाना। ‘बात का पेंच खोलना’ का सीधा अर्थ बात को सहज और स्पष्ट करना है, जो (iii) है।
विकल्प 2 में 1-(i) और विकल्प 3 में 1-(ii) दिया है, इसलिए ये दोनों विकल्प पहले ही कट जाते हैं।

चरण 2: बचे हुए दो विकल्प:
अब विकल्प 1 और विकल्प 4 बचते हैं। दोनों में 1-(iii) है। अंतर केवल 2 और 3 के जोड़ में है।
विकल्प 1 में 2-(i), 3-(ii) है और विकल्प 4 में 2-(ii), 3-(i) है।

चरण 3: काव्य-पंक्तियों से जाँच:
कवि लिखता है कि ज़ोर-ज़बरदस्ती से बात की चूड़ी मर गई और वह भाषा में बेकार घूमने लगी। बेकार घूमना अर्थात बिना असर के रह जाना है। इसलिए चूड़ी मरना = बात का प्रभावहीन हो जाना (i)।
इससे विकल्प 4 ग़लत हो जाता है, क्योंकि उसमें 2 को (ii) से जोड़ा गया है।

चरण 4: तीसरे जोड़ की पुष्टि:
अंत में कवि ने उसे कील की तरह ठोंक दिया। कील में पेंच जैसी चूड़ी नहीं होती, अतः उसमें कसावट नहीं होती। इसीलिए 3 का जोड़ (ii) बैठता है।

अंतिम उत्तर:
तीनों जोड़ 1-(iii), 2-(i), 3-(ii) केवल विकल्प 1 में हैं। उत्तर विकल्प 1 है।
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Question: 7

कवि को किस बात का डर था ?

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‘वही हुआ जिसका मुझे डर था’ के ठीक बाद बात की चूड़ी मरने की बात है, अतः डर बात के और बिगड़ने का था।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कहीं बात बन न जाए
  • कहीं बात और न बिगड़ जाए
  • कहीं कोई बात न हो
  • कहीं बात पकड़ में न आ जाए
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: परिणाम से कारण तक चलना:
काव्यांश में कहा गया है कि बात की चूड़ी मर गई और वह भाषा में बेकार घूमने लगी। यह बात के बिगड़ जाने का परिणाम है।
इससे पहले कवि कहता है कि वही हुआ जिसका उसे डर था। इसका मतलब डर इसी बिगाड़ का था।

चरण 2: विकल्प 1 और 3 को हटाना:
‘कहीं बात बन न जाए’ कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता, और कवि भी बात बनाना चाहता था। अतः विकल्प 1 ग़लत है।
‘कहीं कोई बात न हो’ का भाव कविता में कहीं नहीं मिलता, इसलिए विकल्प 3 भी ग़लत है।

चरण 3: विकल्प 4 को हटाना:
बात के पकड़ में आने या न आने की चिंता कवि ने नहीं की। उसकी चिंता बात के बिगड़ने की थी, इसलिए विकल्प 4 भी ठीक नहीं है।

चरण 4: सही विकल्प की पुष्टि:
कवि ने पेंच को बेतरह कसा और अंत में उसे कील की तरह ठोंक दिया। यह सब बात के और बिगड़ने का ही संकेत है। इसलिए विकल्प 2 सही है।

अंतिम उत्तर:
कवि को डर था कि कहीं बात और न बिगड़ जाए। विकल्प 2।
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Question: 8

‘इस करतब’ के माध्यम से कवि ने किस ओर संकेत किया है ?

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जिस काम पर तमाशबीन वाह-वाह कर रहे थे, वह पेंच को कसना था, यानी बात को शब्दजाल में उलझाना।
Updated On: Oct 27, 2026
  • बात को सहज और सरल बना देने की ओर
  • अपने भाषिक ज्ञान और कौशल की ओर
  • श्रोताओं से मिल रही प्रशंसा की ओर
  • बात को शब्दजाल में उलझाने और जटिल बनाने की ओर
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को सरल बनाना:
प्रश्न पूछता है कि कवि किस काम को ‘करतब’ कह रहा है। उत्तर उसी काम में मिलेगा जिस पर तमाशबीन वाह-वाह कर रहे थे।

चरण 2: जिस पर वाह-वाह हो रही थी:
वाह-वाह उस समय सुनाई दे रही थी जब कवि पेंच को खोलने के बजाय उसे और कस रहा था। यानी वह बात को सीधा कहने के बजाय घुमा-फिराकर और अलंकृत बनाकर कह रहा था।

चरण 3: उदाहरण से समझना:
जैसे कोई सीधी-सी बात कहने के लिए भारी-भरकम शब्द और चमत्कार जोड़ दे, तो लोग उसके खेल पर ताली बजाएँगे, पर बात समझ नहीं आएगी। कवि ने ऐसे ही शब्दों के खेल को करतब कहा है।

चरण 4: विकल्पों को छाँटना:
विकल्प 1 उल्टा अर्थ देता है। विकल्प 2 केवल कौशल की बात करता है, पर यहाँ कौशल का दुरुपयोग दिखाया गया है। विकल्प 3 परिणाम है, करतब नहीं। इसलिए विकल्प 4 सही है।

अंतिम उत्तर:
करतब का अर्थ है बात को शब्दजाल में उलझाकर जटिल बनाना। विकल्प 4।
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Question: 9

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : बात का सही शब्द से जुड़ना ही सहज भावाभिव्यक्ति है।

कारण : प्रत्येक अभिव्यक्ति के लिए कुछ खास शब्द नियत होते हैं, अत: भाषा के प्रयोग में चमत्कार प्रदर्शन से परे अत्यन्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

Show Hint

कविता का संदेश है कि सही शब्द और सावधान भाषा-प्रयोग से ही बात सहज बनती है, अतः कथन और कारण दोनों सही हैं।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • कथन सही है, लेकिन कारण ग़लत है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  • कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
Show Solution

The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: कविता की कथा से शुरुआत:
कविता में बात सीधी थी, पर कवि ने उसे शब्दों के पेंच में फँसा दिया। जब उसने सही शब्द के बजाय चमत्कार का रास्ता लिया तो बात बिगड़ गई।
अंत में सही शब्द मिलने पर ही बात सहज रूप में कही जा सकी।

चरण 2: कथन परखना:
इसका अर्थ है कि बात का सही शब्द से जुड़ना ही सहज अभिव्यक्ति है। अतः कथन सही है।

चरण 3: कारण परखना:
हर भाव के लिए एक उपयुक्त शब्द होता है। उसे छोड़कर चमत्कार दिखाने से भाषा बोझिल हो जाती है। इसलिए सावधानी की आवश्यकता वाली बात भी सही है।

चरण 4: संबंध जोड़ना:
कारण बताता है कि सही शब्द क्यों ज़रूरी है, और कथन उसका परिणाम बताता है। दोनों एक-दूसरे को समझाते हैं, इसलिए कारण कथन की व्याख्या है।

चरण 5: ग़लत विकल्प हटाना:
विकल्प 1, 2 और 4 में से किसी में भी दोनों बातों को पूरी तरह सही और परस्पर जुड़ा नहीं माना गया। केवल विकल्प 3 ऐसा मानता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 सही है।
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Question: 10

तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाही में कौन-सा भाव है ?

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‘तमाशबीन’ शब्द और बिगड़ी हुई बात पर मिल रही वाह-वाह से स्पष्ट है कि कवि का स्वर व्यंग्य का है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • आक्रोश का
  • व्यंग्य का
  • प्रशंसा का
  • समानता का
Show Solution

The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: विकल्पों से शुरुआत:
चार विकल्प हैं – आक्रोश, व्यंग्य, प्रशंसा और समानता। इनमें से हमें वह चुनना है जो पंक्तियों के स्वर से मेल खाए।

चरण 2: समानता और आक्रोश हटाना:
काव्यांश में किसी की बराबरी की बात नहीं है, इसलिए समानता सही नहीं है। कवि किसी पर क्रोध भी नहीं करता, वह अपनी भूल मानता है, इसलिए आक्रोश भी नहीं है।

चरण 3: प्रशंसा और व्यंग्य में अंतर:
शब्द सुनने में प्रशंसा जैसे हैं – शाबाशी और वाह-वाह। पर कवि ने इन्हें करने वालों को ‘तमाशबीन’ कहा है, और उसी करतब से बात बिगड़ गई। जो प्रशंसा बिगाड़ पर हो रही हो, वह असल में कटाक्ष होती है।

चरण 4: निष्कर्ष:
इसलिए ऊपरी रूप में प्रशंसा दिखने पर भी अर्थ की दृष्टि से इसमें व्यंग्य है।

अंतिम उत्तर:
सही भाव व्यंग्य का है। विकल्प 2।
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