Question:medium

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

‘बात सीधी थी पर’ कविता के संदर्भ में ‘भाषा में पेंच कसना’ के आशय को स्पष्ट कीजिए।

Show Hint

पेंच ज़्यादा कसने पर उसकी चूड़ी मर जाती है, वैसे ही बनावटी भाषा से बात उलझ जाती है।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: मुहावरे जैसे प्रयोग को समझना:
कविता में कवि ने बात को पेंच की तरह माना है। पेंच तब काम करता है जब उसे सही कसा जाए। ज़ोर से ज़्यादा कसने पर उसकी चूड़ी घिस जाती है और वह बेकार घूमता है।

चरण 2: कविता की घटना से जोड़ना:
कवि की बात सीधी थी, पर उसने उसे चमत्कारी शब्दों में रखने के लिए भाषा से ज़ोर-ज़बरदस्ती की। इसका फल यह हुआ कि बात भाषा में उलझकर अपना असर खो बैठी।

चरण 3: आदर्श उत्तर (लगभग 40 शब्द):
कवि ने अपनी सीधी बात को असरदार बनाने के लिए भाषा को ज़रूरत से ज़्यादा कसा। इसी को भाषा में पेंच कसना कहा गया है। इसका आशय है कि बनावटी और जटिल भाषा बात को स्पष्ट नहीं, बल्कि उलझा हुआ बना देती है।

अंतिम उत्तर:
भाषा में पेंच कसना यानी बात को बनावटी भाषा में उलझा देना।
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