चरण 1: प्रश्न का आशय:
लोकोक्ति ‘समरथ को नहिं दोष गोसाईं’ का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग करना है।
चरण 2: भाव और स्रोत:
इसमें समरथ का अर्थ है शक्तिशाली और गोसाईं का अर्थ है स्वामी। भाव यह है कि बलवान व्यक्ति कुछ भी गलत करे, समाज उसे दोषी नहीं मानता। यह कथन तुलसीदास की रचना रामचरितमानस से लोक में प्रचलित हुआ।
चरण 3: उदाहरण:
धनी ठेकेदार ने सरकारी जमीन घेर ली, पर किसी ने आपत्ति नहीं की, सच है कि समरथ को नहिं दोष गोसाईं।
निष्कर्ष:
समरथ को नहिं दोष गोसाईं: ताकतवर के दोष कोई नहीं देखता।