चरण 1: प्रसंग:
कक्षा 12 की संस्कृत दिग्दर्शिका के पाठ ‘संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्’ का यह अंश संस्कृत के प्रसिद्ध कवियों को याद करते हुए इस भाषा का गौरव बताता है।
चरण 2: वाक्य-क्रम से अनुवाद:
1. संस्कृत के पहले कवि वाल्मीकि, महर्षि वेदव्यास, कवियों के गुरु कालिदास और भास, भारवि, भवभूति जैसे अन्य बड़े कवि अपनी अमर रचनाओं के कारण अब भी पाठकों के मन में बसे हुए हैं।
2. हमें इस भाषा को माँ की तरह आदर देना और प्रणाम करना चाहिए।
3. कारण यह है कि भारतमाता की आज़ादी, प्रतिष्ठा, अखण्डता और संस्कृति की एकता को संस्कृत के द्वारा ही बचाया जा सकता है।
4. यह संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे पुरानी और उत्तम है।
5. इसलिए यह उक्ति सही है: सब भाषाओं में प्रमुख, मधुर और दिव्य भाषा देववाणी संस्कृत है।
चरण 3: कठिन शब्द:
अद्यापि = आज भी। सम्माननीया = आदर के योग्य। वन्दनीया = प्रणाम के योग्य। सुष्ठूक्तम् = ठीक कहा गया।
चरण 4: सार:
गद्यांश का भाव है कि संस्कृत महाकवियों की भाषा और देश की एकता की आधार-भाषा है। इसलिए हमें इसका सम्मान करना चाहिए।