Comprehension

सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना

मैं पेंच को खोलने के बजाए

उसे बेतरह कसता चला जा रहा था

क्योंकि इस करतब पर मुझे

साफ़ सुनाई दे रही थी

तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाह।

आखिरकार वही हुआ जिसका मुझे डर था

ज़ोर ज़बरदस्ती से

बात की चूड़ी मर गई

और वह भाषा में बेकार घूमने लगी !

हारकर मैंने उसे कील की तरह

उसी जगह ठोंक दिया।

Question: 1

कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए :

कॉलम-Iकॉलम-II
1. बात का पेंच खोलना(i) बात का प्रभावहीन हो जाना
2. बात की चूड़ी मर जाना(ii) बात में कसावट का न होना
3. पेंच को कील की तरह ठोंक देना(iii) बात को सहज और स्पष्ट करना

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पेंच खोलना यानी बात स्पष्ट करना, चूड़ी मरना यानी बात प्रभावहीन होना और कील की तरह ठोंकना यानी कसावट न रहना।
Updated On: Oct 27, 2026
  • 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
  • 1-(i), 2-(ii), 3-(iii)
  • 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
  • 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: पहले जोड़ से विकल्प छाँटना:
पेंच खोलना यानी उलझन सुलझाना। ‘बात का पेंच खोलना’ का सीधा अर्थ बात को सहज और स्पष्ट करना है, जो (iii) है।
विकल्प 2 में 1-(i) और विकल्प 3 में 1-(ii) दिया है, इसलिए ये दोनों विकल्प पहले ही कट जाते हैं।

चरण 2: बचे हुए दो विकल्प:
अब विकल्प 1 और विकल्प 4 बचते हैं। दोनों में 1-(iii) है। अंतर केवल 2 और 3 के जोड़ में है।
विकल्प 1 में 2-(i), 3-(ii) है और विकल्प 4 में 2-(ii), 3-(i) है।

चरण 3: काव्य-पंक्तियों से जाँच:
कवि लिखता है कि ज़ोर-ज़बरदस्ती से बात की चूड़ी मर गई और वह भाषा में बेकार घूमने लगी। बेकार घूमना अर्थात बिना असर के रह जाना है। इसलिए चूड़ी मरना = बात का प्रभावहीन हो जाना (i)।
इससे विकल्प 4 ग़लत हो जाता है, क्योंकि उसमें 2 को (ii) से जोड़ा गया है।

चरण 4: तीसरे जोड़ की पुष्टि:
अंत में कवि ने उसे कील की तरह ठोंक दिया। कील में पेंच जैसी चूड़ी नहीं होती, अतः उसमें कसावट नहीं होती। इसीलिए 3 का जोड़ (ii) बैठता है।

अंतिम उत्तर:
तीनों जोड़ 1-(iii), 2-(i), 3-(ii) केवल विकल्प 1 में हैं। उत्तर विकल्प 1 है।
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Question: 2

कवि को किस बात का डर था ?

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‘वही हुआ जिसका मुझे डर था’ के ठीक बाद बात की चूड़ी मरने की बात है, अतः डर बात के और बिगड़ने का था।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कहीं बात बन न जाए
  • कहीं बात और न बिगड़ जाए
  • कहीं कोई बात न हो
  • कहीं बात पकड़ में न आ जाए
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: परिणाम से कारण तक चलना:
काव्यांश में कहा गया है कि बात की चूड़ी मर गई और वह भाषा में बेकार घूमने लगी। यह बात के बिगड़ जाने का परिणाम है।
इससे पहले कवि कहता है कि वही हुआ जिसका उसे डर था। इसका मतलब डर इसी बिगाड़ का था।

चरण 2: विकल्प 1 और 3 को हटाना:
‘कहीं बात बन न जाए’ कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता, और कवि भी बात बनाना चाहता था। अतः विकल्प 1 ग़लत है।
‘कहीं कोई बात न हो’ का भाव कविता में कहीं नहीं मिलता, इसलिए विकल्प 3 भी ग़लत है।

चरण 3: विकल्प 4 को हटाना:
बात के पकड़ में आने या न आने की चिंता कवि ने नहीं की। उसकी चिंता बात के बिगड़ने की थी, इसलिए विकल्प 4 भी ठीक नहीं है।

चरण 4: सही विकल्प की पुष्टि:
कवि ने पेंच को बेतरह कसा और अंत में उसे कील की तरह ठोंक दिया। यह सब बात के और बिगड़ने का ही संकेत है। इसलिए विकल्प 2 सही है।

अंतिम उत्तर:
कवि को डर था कि कहीं बात और न बिगड़ जाए। विकल्प 2।
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Question: 3

‘इस करतब’ के माध्यम से कवि ने किस ओर संकेत किया है ?

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जिस काम पर तमाशबीन वाह-वाह कर रहे थे, वह पेंच को कसना था, यानी बात को शब्दजाल में उलझाना।
Updated On: Oct 27, 2026
  • बात को सहज और सरल बना देने की ओर
  • अपने भाषिक ज्ञान और कौशल की ओर
  • श्रोताओं से मिल रही प्रशंसा की ओर
  • बात को शब्दजाल में उलझाने और जटिल बनाने की ओर
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न को सरल बनाना:
प्रश्न पूछता है कि कवि किस काम को ‘करतब’ कह रहा है। उत्तर उसी काम में मिलेगा जिस पर तमाशबीन वाह-वाह कर रहे थे।

चरण 2: जिस पर वाह-वाह हो रही थी:
वाह-वाह उस समय सुनाई दे रही थी जब कवि पेंच को खोलने के बजाय उसे और कस रहा था। यानी वह बात को सीधा कहने के बजाय घुमा-फिराकर और अलंकृत बनाकर कह रहा था।

चरण 3: उदाहरण से समझना:
जैसे कोई सीधी-सी बात कहने के लिए भारी-भरकम शब्द और चमत्कार जोड़ दे, तो लोग उसके खेल पर ताली बजाएँगे, पर बात समझ नहीं आएगी। कवि ने ऐसे ही शब्दों के खेल को करतब कहा है।

चरण 4: विकल्पों को छाँटना:
विकल्प 1 उल्टा अर्थ देता है। विकल्प 2 केवल कौशल की बात करता है, पर यहाँ कौशल का दुरुपयोग दिखाया गया है। विकल्प 3 परिणाम है, करतब नहीं। इसलिए विकल्प 4 सही है।

अंतिम उत्तर:
करतब का अर्थ है बात को शब्दजाल में उलझाकर जटिल बनाना। विकल्प 4।
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Question: 4

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :

कथन : बात का सही शब्द से जुड़ना ही सहज भावाभिव्यक्ति है।

कारण : प्रत्येक अभिव्यक्ति के लिए कुछ खास शब्द नियत होते हैं, अत: भाषा के प्रयोग में चमत्कार प्रदर्शन से परे अत्यन्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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कविता का संदेश है कि सही शब्द और सावधान भाषा-प्रयोग से ही बात सहज बनती है, अतः कथन और कारण दोनों सही हैं।
Updated On: Oct 27, 2026
  • कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
  • कथन सही है, लेकिन कारण ग़लत है।
  • कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
  • कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

चरण 1: कविता की कथा से शुरुआत:
कविता में बात सीधी थी, पर कवि ने उसे शब्दों के पेंच में फँसा दिया। जब उसने सही शब्द के बजाय चमत्कार का रास्ता लिया तो बात बिगड़ गई।
अंत में सही शब्द मिलने पर ही बात सहज रूप में कही जा सकी।

चरण 2: कथन परखना:
इसका अर्थ है कि बात का सही शब्द से जुड़ना ही सहज अभिव्यक्ति है। अतः कथन सही है।

चरण 3: कारण परखना:
हर भाव के लिए एक उपयुक्त शब्द होता है। उसे छोड़कर चमत्कार दिखाने से भाषा बोझिल हो जाती है। इसलिए सावधानी की आवश्यकता वाली बात भी सही है।

चरण 4: संबंध जोड़ना:
कारण बताता है कि सही शब्द क्यों ज़रूरी है, और कथन उसका परिणाम बताता है। दोनों एक-दूसरे को समझाते हैं, इसलिए कारण कथन की व्याख्या है।

चरण 5: ग़लत विकल्प हटाना:
विकल्प 1, 2 और 4 में से किसी में भी दोनों बातों को पूरी तरह सही और परस्पर जुड़ा नहीं माना गया। केवल विकल्प 3 ऐसा मानता है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 3 सही है।
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Question: 5

तमाशबीनों की शाबाशी और वाह-वाही में कौन-सा भाव है ?

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‘तमाशबीन’ शब्द और बिगड़ी हुई बात पर मिल रही वाह-वाह से स्पष्ट है कि कवि का स्वर व्यंग्य का है।
Updated On: Oct 27, 2026
  • आक्रोश का
  • व्यंग्य का
  • प्रशंसा का
  • समानता का
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: विकल्पों से शुरुआत:
चार विकल्प हैं – आक्रोश, व्यंग्य, प्रशंसा और समानता। इनमें से हमें वह चुनना है जो पंक्तियों के स्वर से मेल खाए।

चरण 2: समानता और आक्रोश हटाना:
काव्यांश में किसी की बराबरी की बात नहीं है, इसलिए समानता सही नहीं है। कवि किसी पर क्रोध भी नहीं करता, वह अपनी भूल मानता है, इसलिए आक्रोश भी नहीं है।

चरण 3: प्रशंसा और व्यंग्य में अंतर:
शब्द सुनने में प्रशंसा जैसे हैं – शाबाशी और वाह-वाह। पर कवि ने इन्हें करने वालों को ‘तमाशबीन’ कहा है, और उसी करतब से बात बिगड़ गई। जो प्रशंसा बिगाड़ पर हो रही हो, वह असल में कटाक्ष होती है।

चरण 4: निष्कर्ष:
इसलिए ऊपरी रूप में प्रशंसा दिखने पर भी अर्थ की दृष्टि से इसमें व्यंग्य है।

अंतिम उत्तर:
सही भाव व्यंग्य का है। विकल्प 2।
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