तिरती है समीर-सागर पर
अस्थिर सुख पर दुख की छाया –
जग के दग्ध हृदय पर
निर्दय विप्लव की प्लावित माया –
यह तेरी रण-तरी
भरी आकांक्षाओं से,
घन, भेरी-गर्जन से सजग सुप्त अंकुर
उर में पृथ्वी के, आशाओं से
नवजीवन की, ऊँचा कर सिर,
ताक रहे हैं, ऐ विप्लव के बादल !
पृथ्वी में सोए हुए अंकुरों पर किसका प्रभाव पड़ता है ?
प्रस्तुत काव्यांश में कवि बादलों के विप्लवकारी रूप का आह्वान क्यों कर रहा है ?
‘सुप्त अंकुर’ का प्रयोग किस भावना/प्रक्रिया को प्रकट करता है ?
‘प्लावित माया’ को किस संदर्भ में प्रयुक्त किया गया है ?
‘घन, भेरी-गर्जन’ से कवि ने किसका बोध कराया है ?
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :
‘बादल राग’ कविता में ‘जीवन का पारावार’ किसे कहा गया है और क्यों ?
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :
“ ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी वर्तमान युग में बदलते हुए जीवन मूल्यों की कहानी है।” स्पष्ट कीजिए कि ये जीवन मूल्य कौन-से हैं और क्यों बदल रहे हैं।
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए :
“जिम्मेदारी सर पर पड़ेगी तब सब अपने ही आप ठीक हो जाएँगे।” यशोधर बाबू का ऐसा सोचना कहाँ तक सही था ? यदि आपको कोई जिम्मेदारी दी जाए तो आप उसका निर्वहन कैसे करेंगे ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :
‘बादल राग’ कविता में कवि ने ऐसा क्यों कहा है कि ‘सदा पंक पर ही होता जल-विप्लव-प्लावन’ ?