चरण 1: चुना गया छन्द:
विकल्प में चौपाई और सोरठा हैं। इस समाधान में दूसरे छन्द 'सोरठा' का उत्तर दिया गया है।
चरण 2: लक्षण:
सोरठा अर्द्धसम मात्रिक छन्द है और दोहे का उलटा रूप है। इसके पहले और तीसरे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं और दूसरे तथा चौथे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। कुल 48 मात्राएँ होती हैं। पहले और तीसरे चरण के अंत में तुक मिलती है।
चरण 3: उदाहरण (तुलसीदास, रामचरितमानस):
मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलि मल दहन॥
चरण 4: जाँच:
'मूक होइ बाचाल' में 11 मात्राएँ हैं और 'पंगु चढ़इ गिरिबर गहन' में 13 मात्राएँ हैं। यही 11 और 13 का क्रम दूसरी पंक्ति में भी है। 'बाचाल' और 'दयाल' की तुक विषम चरणों के अंत में मिलती है।
अंतिम उत्तर:
सोरठा में 11 और 13 मात्राओं का क्रम होता है, यह दोहे का उलटा रूप है।