चरण 1: प्रसंग और सन्दर्भ:
यह अंश ‘संस्कृत दिग्दर्शिका’ के गद्य-खण्ड में आए पाठ ‘संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्’ का एक अंश है। पाठ में लेखक ने संस्कृत की महिमा बताई है।
चरण 2: कठिन पदों का अर्थ:
सत्प्रेरणा = अच्छी प्रेरणा। चरित्रनिर्माणार्थम् = चरित्र बनाने के लिए। किं बहुना = अधिक कहने से क्या लाभ। मूलभूत = बुनियादी, आधारभूत। अन्यत्र = दूसरी जगह। अद्वितीयम् = जिसके समान दूसरा न हो।
चरण 3: वाक्य-दर-वाक्य अनुवाद:
1. संस्कृत का साहित्य सरस है और उसका व्याकरण भी पक्का है।
2. उसके गद्य तथा पद्य में लालित्य, भाव प्रकट करने की क्षमता और बेजोड़ सुनने की मिठास है।
3. अधिक क्या कहें, चरित्र-निर्माण के लिए संस्कृत वाङ्मय जैसी सत्प्रेरणा देता है, वैसी कोई और नहीं देता।
4. बुनियादी मानवीय गुणों की जैसी व्याख्या संस्कृत साहित्य में है, वैसी दूसरी जगह नहीं है।
चरण 4: भावार्थ:
संस्कृत केवल पुरानी भाषा नहीं है। वह सुन्दर, व्यवस्थित और जीवन को अच्छा बनाने वाली भाषा है।