Step 1: सबस्ट्रेट को पहचानना।
दिया गया यौगिक थैलालडिहाइड है जिसके एक एल्डिहाइड समूह पर ड्यूटेरियम $(-CDO)$ है। इसमें ऐल्फा-हाइड्रोजन नहीं है, इसलिए प्रबल क्षार के साथ यह कैनिजारो अभिक्रिया देगा।
Step 2: अंतःअणुक कैनिजारो (X का बनना)।
सांद्र $NaOH$ और ऊष्मा से एक एल्डिहाइड का ऑक्सीकरण कार्बोक्सिलेट $(-COONa)$ में और दूसरे का अपचयन एल्कोहल में होता है।
Step 3: ड्यूटेरियम का स्थान।
ड्यूटेरियम वाला नीचे का समूह हाइड्राइड ग्रहण कर $-CH(OH)D$ बन जाता है और ऊपर का समूह ऑक्सीकृत होकर $-COONa$ बनता है। यही मध्यवर्ती X है।
Step 4: अम्लीकरण।
X को आधिक्य $HCl$ देने पर पहले $-COONa$ प्रोटॉन लेकर $-COOH$ में बदल जाता है।
Step 5: लैक्टोनीकरण (P का बनना)।
पास-पास के $-COOH$ और $-OH$ समूह आपस में जल त्यागकर चक्रीय एस्टर यानी पाँच-सदस्यीय लैक्टोन बनाते हैं, जिसमें ऊपर $C=O$ और नीचे $CHD$ रहता है।
Step 6: निष्कर्ष।
X $= -COONa$ (ऊपर), $-CH(OH)D$ (नीचे) तथा P एक पाँच-सदस्यीय लैक्टोन है, जो विकल्प (a) से मेल खाता है।
\[ \boxed{\text{X = -COONa (top), -CH(OH)D (bottom); P = 5-membered lactone (C=O top, CHD bottom)}} \]