इस वाक्य में, कर्ता ("मुझसे") और कर्म दोनों मौजूद नहीं हैं, और क्रिया ("हँसा नहीं जाता") एक भाव या स्थिति को दर्शाती है।
भाववाच्य वाक्यों में, कर्ता और कर्म दोनों की प्रधानता नहीं होती, बल्कि क्रिया द्वारा व्यक्त भाव या स्थिति ही मुख्य होती है। ऐसे वाक्यों में, क्रिया किसी कार्य के होने या न होने की भावना, स्थिति या परिस्थिति को व्यक्त करती है।
इस उदाहरण में, 'मुझसे' कर्ता नहीं है, बल्कि क्रिया से संबंध दर्शाता है, और क्रिया 'हँसा नहीं जाता' यह बताती है कि हँसना संभव नहीं है, यानी असमर्थता या भाव व्यक्त किया गया है।
इसलिए, भाववाच्य में क्रिया की प्रधानता होती है और यह वाक्य की भावना या स्थिति को स्पष्ट करती है, जहाँ कर्ता और कर्म गौण हो जाते हैं या अनुपस्थित रहते हैं।