विश्लेषण: हिंदी व्याकरण में वाच्य के तीन प्रमुख भेद माने जाते हैं — कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य।
इनमें से कर्तृवाच्य वह वाच्य है जिसमें वाक्य का मुख्य केंद्र या प्रधान तत्व ‘कर्ता’ होता है।
कर्तृवाच्य में क्रिया का संबंध सीधे कर्ता से होता है और कर्ता ही क्रिया का करने वाला होता है।
ऐसे वाक्यों में कर्ता की भूमिका प्रमुख रहती है तथा वाक्य उसी के अनुसार व्यवस्थित होता है।
उदाहरण के लिए — “राम पुस्तक पढ़ता है।” यहाँ ‘राम’ कर्ता है और वही क्रिया का करने वाला है, इसलिए वाक्य में उसकी प्रधानता है।
इसके विपरीत कर्मवाच्य में कर्म को महत्व दिया जाता है और भाववाच्य में केवल भाव या क्रिया पर जोर होता है।
इस प्रकार कर्तृवाच्य की पहचान कर्ता की सक्रिय भूमिका और प्रधानता से होती है।
निष्कर्ष: अतः ‘कर्तृवाच्य’ में प्रधानता कर्ता की होती है।