विश्लेषण: हिंदी व्याकरण में पदों को उनके रूप-परिवर्तन के आधार पर दो मुख्य वर्गों में बाँटा जाता है — विकारी पद और अविकारी पद।
विकारी पद वे होते हैं जिनके रूप लिंग, वचन, पुरुष, कारक आदि के अनुसार बदलते रहते हैं।
जब किसी शब्द के अलग-अलग रूप वाक्य में उसके प्रयोग के अनुसार मिलते हैं, तो वह रूप-परिवर्तन उसकी विकारिता को दर्शाता है।
उदाहरण के लिए — ‘लड़का’, ‘लड़के’, ‘लड़कों’ आदि रूप एक ही शब्द के विभिन्न रूप हैं, जो वचन और कारक के अनुसार बदलते हैं।
इसी प्रकार क्रियाओं के रूप भी पुरुष और वचन के अनुसार बदलते हैं, जैसे — जाता हूँ, जाता है, जाते हैं।
इसके विपरीत अविकारी पदों (जैसे — और, लेकिन, बहुत, यहाँ आदि) के रूप नहीं बदलते, वे हर स्थिति में एक जैसे रहते हैं।
अतः जिन शब्दों के रूप वाक्य के अनुसार बदलते हैं, उन्हें विकारी पद कहा जाता है।
निष्कर्ष: जिनके अलग-अलग रूप वाक्यों में मिलते हैं, वे विकारी पद कहलाते हैं।