Comprehension

जो वृद्ध हो गये हैं, जो अपनी बाल्यावस्था और तरुणावस्था से दूर हट आए हैं, उन्हें अपने अतीतकाल की स्मृति बड़ी सुखद लगती है। वे अतीत का ही स्वप्न देखते हैं। तरुणों के लिए जैसे भविष्य उज्ज्वल होता है, वैसे ही वृद्धों के लिए अतीत। वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है। तरुण भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं और वृद्ध अतीत को खींचकर वर्तमान में देखना चाहते हैं। तरुण क्रान्ति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक। इन्हीं दोनों के कारण वर्तमान सदैव क्षुब्ध रहता है और इसी से वर्तमान काल सदैव सुधारों का काल बना रहता है।

Question: 1

उपर्युक्त अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।

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जब भी गद्यांश में "तरुण", "वृद्ध", "अतीत" और "भविष्य" जैसे तुलनात्मक शब्दों का प्रयोग हो, तो वह प्रायः 'क्या लिखूँ?' निबंध से होता है।
Updated On: Feb 19, 2026
  • पाठ: क्या लिखूँ?, लेखक: पदुमलाल पुन्नालाल 'बख्शी'
  • पाठ: मित्रता, लेखक: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  • पाठ: भारतीय संस्कृति, लेखक: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • पाठ: अजन्ता, लेखक: भगवतशरण उपाध्याय
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

विश्लेषण: प्रस्तुत अवतरण में वृद्ध और तरुण वर्ग की मानसिकता का अत्यंत सूक्ष्म एवं मनोवैज्ञानिक चित्रण किया गया है।
लेखक ने बताया है कि वृद्ध व्यक्ति अपने अतीत की स्मृतियों में सुख अनुभव करते हैं, क्योंकि वे जीवन के उस चरण से आगे बढ़ चुके होते हैं जहाँ सक्रिय संघर्ष और निर्माण की प्रक्रिया कम हो जाती है।
वे अपने बीते हुए समय को ही आदर्श मानते हैं और उसी को वर्तमान में पुनः स्थापित करना चाहते हैं।

इसके विपरीत तरुण वर्ग भविष्य के सपनों से प्रेरित होता है।
उसे वर्तमान से असंतोष रहता है और वह परिवर्तन तथा क्रांति का समर्थक बनकर नए आदर्शों की स्थापना करना चाहता है।
लेखक ने बड़ी सुंदरता से यह स्पष्ट किया है कि वृद्ध अतीत के गौरव के संरक्षक होते हैं, जबकि तरुण भविष्य के निर्माणकर्ता।

इन्हीं दोनों प्रवृत्तियों के संघर्ष के कारण वर्तमान समय सदैव गतिशील और सुधारों से युक्त बना रहता है।
यह चिंतनात्मक और विचारप्रधान शैली उस निबंध की विशेषता है जिसमें सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण का संतुलित विश्लेषण मिलता है।

निष्कर्ष: उपर्युक्त अवतरण का पाठ क्या लिखूँ? है तथा इसके लेखक पदुमलाल पुन्नालाल 'बख्शी' हैं।
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Question: 2

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (रेखांकित अंश: तरुणों के लिए जैसे भविष्य उज्ज्वल होता है, वैसे ही वृद्धों के लिए अतीत। तरुण क्रान्ति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक।)

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व्याख्या करते समय "क्रान्ति" शब्द को नवीनता और "संरक्षक" शब्द को पुरानी मर्यादाओं से जोड़कर लिखें।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

विश्लेषण: रेखांकित अंश में लेखक ने तरुणों और वृद्धों की मानसिकता का अत्यंत सूक्ष्म और यथार्थ चित्रण किया है।
लेखक का आशय है कि जीवन के विभिन्न चरणों के अनुसार मनुष्य की सोच और दृष्टिकोण बदल जाता है।

तरुण अवस्था उत्साह, ऊर्जा और आकांक्षाओं से भरी होती है।
युवाओं के सामने जीवन का लंबा भविष्य होता है, इसलिए वे आने वाले समय को उज्ज्वल, आशाजनक और संभावनाओं से परिपूर्ण मानते हैं।
वे वर्तमान की सीमाओं से संतुष्ट नहीं रहते और समाज में परिवर्तन लाने के लिए उत्सुक रहते हैं।
इसी कारण तरुण क्रान्ति के समर्थक होते हैं, क्योंकि वे नई व्यवस्था, नए विचार और नए आदर्श स्थापित करना चाहते हैं।

इसके विपरीत वृद्धावस्था अनुभव, स्मृतियों और बीते हुए समय से जुड़ी होती है।
वृद्ध व्यक्ति अपने जीवन के स्वर्णिम क्षणों और अतीत के गौरव को स्मरण करते हैं, जो उन्हें सुखद प्रतीत होता है।
उनके लिए अतीत ही उज्ज्वल और आदर्श प्रतीत होता है।
वे परंपराओं, मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा को आवश्यक मानते हैं, इसलिए उन्हें अतीत गौरव का संरक्षक कहा गया है।

इस प्रकार लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि तरुण और वृद्ध दोनों की सोच में स्वाभाविक अंतर होता है।
युवक परिवर्तन और प्रगति के प्रतीक हैं, जबकि वृद्ध परंपरा और अनुभव के प्रतिनिधि हैं।

निष्कर्ष: अतः रेखांकित अंश का भाव यह है कि युवावस्था भविष्य की ओर उन्मुख होकर परिवर्तन चाहती है, जबकि वृद्धावस्था अतीत की महिमा को सुरक्षित रखना चाहती है।
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Question: 3

लेखक ने वर्तमान काल को सुधारों का काल क्यों कहा है?

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उत्तर लिखते समय गद्यांश की अंतिम पंक्ति "इन्हीं दोनों के कारण वर्तमान सदैव क्षुब्ध रहता है..." का सन्दर्भ अवश्य लें।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

विश्लेषण: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने तरुणों और वृद्धों की मानसिकता का तुलनात्मक वर्णन किया है।
वृद्ध लोग अपने अतीत की सुखद स्मृतियों में जीते हैं और अतीत को वर्तमान में पुनः स्थापित करना चाहते हैं।
उन्हें अपने बीते हुए समय की बातें अधिक प्रिय लगती हैं, इसलिए वे अतीत के गौरव के संरक्षण में विश्वास रखते हैं।

दूसरी ओर तरुण वर्ग भविष्य की ओर देखता है।
उसे वर्तमान से असंतोष होता है और वह भविष्य को अधिक उज्ज्वल बनाने के लिए परिवर्तन और क्रान्ति का समर्थन करता है।
तरुण वर्तमान व्यवस्था में सुधार लाकर एक नई दिशा देना चाहते हैं।

इस प्रकार एक ओर वृद्ध अतीत को वर्तमान में लाने का प्रयास करते हैं और दूसरी ओर तरुण भविष्य को वर्तमान में स्थापित करना चाहते हैं।
इन दोनों विचारधाराओं के टकराव से वर्तमान समय में निरंतर हलचल और परिवर्तन की स्थिति बनी रहती है।
इसी संघर्ष और परिवर्तन की प्रक्रिया के कारण वर्तमान काल में निरंतर सुधार होते रहते हैं।

निष्कर्ष: इसलिए लेखक ने वर्तमान काल को सुधारों का काल कहा है, क्योंकि तरुणों और वृद्धों की भिन्न-भिन्न सोच एवं उनके प्रयासों के कारण समाज में निरंतर परिवर्तन और सुधार होते रहते हैं।
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