Question:medium

गद्यांश: निन्दा कुछ लोगों की पूँजी होती है। बड़ा लम्बा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूँजी से। कई लोगों की रिसपेक्टेबिलिटी (प्रतिष्ठा) ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण पर आधारित होती है। बड़े रस-विभोर होकर वे जिस-तिस की सत्य-कल्पित कलंक-कथा सुनाते हैं और स्वयं को पूर्ण संत समझने-समझाने की तुष्टि का अनुभव करते हैं।
(iv) 'सत्य-कल्पित कलंक-कथा' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
गद्यांश में बताया गया है कि निन्दक बड़े रस से जिस-तिस की कलंक-कथा सुनाते हैं। उसी कथा के लिए यह पद आया है।

चरण 2: पद का विश्लेषण:
सत्य का अर्थ सच, कल्पित का अर्थ गढ़ा हुआ और कलंक-कथा का अर्थ किसी पर दोष लगाने वाली कहानी है।
निन्दक असली घटना में अपनी कल्पना मिलाकर उसे और बुरा बना देते हैं, ताकि सुनने वालों को मज़ा आए।

अंतिम उत्तर:
सच और कल्पना के मेल से बनी किसी की बदनामी की कथा ही सत्य-कल्पित कलंक-कथा है।
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