Question:medium

गद्यांश: यह अनुभव कितना चमत्कारी है कि यहाँ जो जितनी बूढ़ी है वह उतनी ही अधिक उत्फुल्ल मुसकानमयी है। यह किस दीपक की जोत है? जागरूक जीवन की! लक्ष्यदर्शी जीवन की! सेवा-निरत जीवन की! अपने विश्वासों के साथ एकाग्र जीवन की! भाषा के भेद रहे हैं, रहेंगे भी, पर यह जोत विश्व की सर्वोत्तम जोत है।
(iii) गद्यांश का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: केन्द्रीय भाव:
इस अंश का केन्द्रीय भाव है कि प्रसन्नता कारण के साथ आती है, और उसका कारण जीवन जीने का ढंग है।

चरण 2: लेखक क्या कहना चाहता है:
जो लोग सजग रहते हैं, ऊँचा लक्ष्य रखते हैं, दूसरों की सेवा करते हैं और अपने विश्वासों पर टिके रहते हैं, वे बूढ़े होकर भी खिले हुए रहते हैं। लेखक इसी सच्चाई को सामने रखना चाहता है।
साथ ही वह कहता है कि यह गुण किसी एक भाषा का नहीं, पूरे संसार का साझा प्रकाश है।

चरण 3: शिक्षा:
अपना जीवन अर्थपूर्ण बनाएँ, तभी आयु के साथ हँसी घटेगी नहीं, बढ़ेगी।

निष्कर्ष:
गद्यांश का उद्देश्य जागरूक, लक्ष्यदर्शी और सेवा-निरत जीवन की श्रेष्ठता स्पष्ट करना है।
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