चरण 1: कठिन शब्दों के अर्थ:
जोत का अर्थ है दीपक की लौ या प्रकाश। जागरूक जीवन का अर्थ है सचेत होकर जीना। लक्ष्यदर्शी का अर्थ है जिसकी दृष्टि अपने लक्ष्य पर हो। सेवा-निरत का अर्थ है दूसरों की सेवा में लीन।
चरण 2: भावार्थ:
लेखक देखता है कि वृद्ध स्त्रियों के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि हँसी है। वह पूछता है कि यह उजाला कहाँ से आता है। उत्तर वह चार बातों में देता है: सजग रहना, लक्ष्य को पहचानना, सेवा करना और अपने विश्वास में मन को एकाग्र रखना। जब जीवन में ये चार गुण हों, तब अन्दर एक दीपक जलता रहता है, जो बुढ़ापे में भी नहीं बुझता।
चरण 3: भाषा की बात:
लेखक मानता है कि बोली और भाषा का अन्तर मिटेगा नहीं। फिर भी यह उजाला हर भाषा वाले के लिए एक जैसा है और सारे संसार में सबसे ऊँचा है।
चरण 4: शैली की विशेषता:
छोटे-छोटे वाक्य, बार-बार आने वाला जीवन की शब्द और प्रश्न-उत्तर की शैली इस अंश को प्रभावशाली बनाते हैं।
निष्कर्ष:
जो व्यक्ति सजग, लक्ष्यवान और सेवाभावी है, वह सदा प्रसन्न रहता है।