Question:easy

गद्यांश: पुष्पित अशोक को देखकर मेरा मन उदास हो जाता है। इसलिए नहीं कि सुन्दर वस्तुओं को हतभाग्य समझने में मुझे कोई विशेष रस मिलता है। कुछ लोगों को मिलता है। वे बहुत दूरदर्शी होते हैं। जो भी सामने पड़ गया, उसके जीवन के अन्तिम महूर्त तक का हिसाब वे लगा लेते हैं। मेरी दृष्टि इतनी दूर तक नहीं जाती। फिर भी मेरा मन इस फूल को देखकर उदास हो जाता है। असली कारण मेरे अन्तर्यामी ही जानते होंगे, कुछ थोड़ा-सा मैं भी अनुमान कर सकता हूँ।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ और लेखक:
ये पंक्तियाँ हिन्दी के प्रसिद्ध निबन्धकार आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की रचना ‘अशोक के फूल’ से ली गई हैं। यह ललित निबन्ध है और पाठ्य-पुस्तक के गद्य-भाग में दिया गया है।

चरण 2: यह अंश कहाँ आता है:
निबन्ध की शुरुआत में ही लेखक कहते हैं कि खिले हुए अशोक को देखकर उनका मन उदास हो जाता है। इसी उदासी की भूमिका इस गद्यांश में बाँधी गई है।

अंतिम उत्तर:
सन्दर्भ: ‘अशोक के फूल’ निबन्ध, लेखक आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी।
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