Question:easy

गद्यांश: यह प्रणाम-भाव ही भूमि और जन का दृढ़ बन्धन है। इसी दृढ़ भित्ति पर राष्ट्र का भवन तैयार किया जाता है। इसी दृढ़ चट्टान पर राष्ट्र का चिर जीवन आश्रित रहता है। इसी मर्यादा को मानकर राष्ट्र के प्रति मनुष्यों के कर्तव्य और अधिकारों का उदय होता है। जो जन पृथ्वी के साथ माता और पुत्र के संबंध को स्वीकार करता है, उसे पृथ्वी के वरदानों में भाग पाने का अधिकार है। माता के प्रति अनुराग और सेवाभाव पुत्र का स्वाभाविक कर्तव्य है। वह एक निष्कारण धर्म है। स्वार्थ के लिए पुत्र का माता के प्रति प्रेम, पुत्र के अधःपतन को सूचित करता है।
(i) पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: लेखक का परिचय:
इस गद्यांश के रचयिता डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल हैं। वे हिन्दी के निबन्धकार, संस्कृति-चिन्तक और पुरातत्त्ववेत्ता थे। उनके निबन्धों में भारतीय संस्कृति का गहरा विवेचन मिलता है।

चरण 2: पाठ की पहचान:
गद्यांश में भूमि के प्रति प्रणाम-भाव और माता-पुत्र के सम्बन्ध की चर्चा है। यह विषय ‘राष्ट्र का स्वरूप’ निबन्ध का है। यही इस पाठ का शीर्षक है।

अंतिम उत्तर:
पाठ: राष्ट्र का स्वरूप, लेखक: वासुदेवशरण अग्रवाल।
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