Question:medium

काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘बात सीधी थी पर’ कविता के आधार पर लिखिए कि भाषा को अर्थ की परिणति तक पहुँचाने के लिए कवि क्या-क्या प्रयास करता है और उसका क्या परिणाम निकलता है।

Show Hint

पेंच, चूड़ी और कील के बिंब को याद कीजिए। ज़ोर-ज़बरदस्ती से बात का क्या हाल हुआ, यह बताइए।
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Solution and Explanation

चरण 1: मूल समस्या को समझें:
कुँवर नारायण की कविता ‘बात सीधी थी पर’ भाषा और कथ्य के संबंध पर आधारित है।
कवि के पास कहने के लिए एक सरल बात थी, पर वह उसे चमत्कारपूर्ण भाषा में कहना चाहता था।

चरण 2: प्रयासों का क्रम:
पहले उसने शब्दों को बदला और वाक्यों को उलट-पलट कर देखा।
फिर उसने भाषा को घुमाया-फिराया और तोड़ा-मरोड़ा, जैसे कोई पेंच को बार-बार कसता है।
जब बात फिर भी नहीं बनी तो उसने धैर्य खोकर उसे कील की तरह ठोंक दिया।

चरण 3: उदाहरण से परिणाम:
जैसे ज़्यादा कसने से पेंच की चूड़ी मर जाती है और वह व्यर्थ हो जाता है, वैसे ही बात का प्रभाव समाप्त हो गया।
बात ने शरारती बच्चे की तरह कवि से पूछा कि क्या तुमने भाषा को सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा।

अंतिम उत्तर:
कवि ने भाषा की कारीगरी, शब्दों की उलट-पलट और ज़ोर-ज़बरदस्ती के प्रयास किए, जिसका परिणाम यह निकला कि बात पेचीदा, कसावहीन और अर्थहीन हो गई। अतः भाषा को सहजता से बरतना ही सही मार्ग है।
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