Question:medium

काव्य-खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘कविता के बहाने’ कविता के आधार पर लिखिए कि कविता की विकास-प्रक्रिया फूलों की तरह होने पर भी फूल उसका मर्म क्यों नहीं समझ सकते ?

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फूल और कविता दोनों खिलते हैं, पर फूल मुरझा जाता है। कविता के 'बिना मुरझाए महकने' पर विचार कीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: कवि का उद्देश्य:
कुँवर नारायण 'कविता के बहाने' में यह बताना चाहते हैं कि कविता की शक्ति प्रकृति की वस्तुओं से भी बड़ी है।
फूल यहाँ एक उदाहरण है, जिसके सहारे कविता की विशेषता स्पष्ट की गई है।

चरण 2: फूल की सीमा:
फूल कली से खिलता है, कुछ दिन सुगंध देता है और फिर झड़ जाता है।
उसकी सुंदरता एक बगीचे या एक घर तक ही सीमित रहती है।

चरण 3: कविता की असीमता:
कविता एक बार रची जाने के बाद पीढ़ियों तक पढ़ी जाती है। वह हर पाठक के मन में नए सिरे से खिलती है।
उसकी महक भीतर मन तक और बाहर समाज तक, हर घर तक पहुँचती है। यह बिना मुरझाए महकना फूल के अनुभव से बाहर है।
जिस वस्तु को कोई स्वयं नहीं जीता, उसका मर्म वह नहीं समझ सकता।

अंतिम उत्तर:
विकास-प्रक्रिया समान होने पर भी फूल का खिलना सीमित और नश्वर है, जबकि कविता का खिलना शाश्वत और सर्वव्यापी है, इसलिए फूल कविता का मर्म नहीं जान सकते।
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